वो चौदह दिन- 9

Views: 75 Category: Chudai Ki Kahani By me.funny123 Published: June 23, 2026

Wo Chodah Din - 9

सेक्स विद वर्जिन बॉय का मजा मैंने ले ही लिया अपने बेटे के दोस्त के साथ. मुझे दस दिन बाद नया लंड मिला था और वो भी एकदम कुंवारा जवान लौड़ा.

कहानी का पिछला भाग: बेटे के दोस्त से चूत चटवाकर रस पिलाया

अब आगे सेक्स विद वर्जिन बॉय का मजा:

गौरव मेरी चूत चाटकर सारा रस पी गया।
अब मैं संतुष्ट थी और बहुत हल्का महसूस कर रही थी।
ऐसा आनन्द 10 दिन बाद आया था।
हम दोनों नहाकर बदन पौंछ कर बाहर आए।

मैंने अपनी वही नाइटी पहनने के लिए उठाई।
गौरव ने मेरी नाइटी छीन ली और बोला, “ऐसे ही रहिए ना। आपका बदन बहुत कातिल है। मैं आपको ऐसे ही देखना चाहता हूं।”

मैंने गौरव को कहा, “सुबह के 10:30 बज चुके हैं। अब तुझे अपनी दुकान पर जाना चाहिए। नहीं तो तेरी मम्मी भी यहां आ सकती है।”
पर गौरव का जाने का मन नहीं था।

मैंने उसको समझाया- अभी चला जा, बाद में फिर प्लान करेंगे।
मेरे समझाने पर वो अपने कपड़े पहन कर वहां से निकल गया।

मैं भी अब बिल्कुल रिलैक्स फील कर रही थी।
मैंने भी अपने कपड़े पहने और नाश्ता करके ऑफिस के लिए निकल गई।

हालांकि मैं बहुत थकी हुई थी पर मैं बहुत खुश थी, हवा में उड़ने का मन था, पानी में तैरने का मन था।

मैं ऑफिस का काम निपटाकर मॉल चली गई और जमकर शॉपिंग की।
शाम को 5 बजे घर आ गई।

अपने लिए चाय बना ही रही थी कि गौरव का कॉल आ गया।
वह पूछने लगा कि कितने बजे तक आऊं।

मेरी जरूरत अभी पूरी हो चुकी थी, अब मुझे आराम करना था।
मैंने गौरव को अभी आने को मना कर दिया।

“रात को आ जाऊँ क्या?” उसने फिर पूछा।
मैंने बोला, “मैं बहुत थकी हुई हूं थोड़ी देर आराम करूंगी। फिर तुझे कॉल करूंगी।”
इतना बोल कर मैंने कॉल कट कर दी।

चाय पीकर मैं बाहर सोफे पर ही लेट गई।

मैं इतनी थकी हुई थी कि लेटते ही मुझे नींद आ गई।
रात को 10.30 बजे मेरे पति राजीव का कॉल आया तो मेरी आंख खुली।

मैंने कॉल पर आज दिन भर की बात खुशी खुशी राजीव को बताई।
मेरी पूरी बात सुन कर राजीव बोले, “अब तो तू ठीक है न?”
मैंने भी “हां” में जवाब दिया।

राजीव बोले, “अब 5 दिन पूरा मजा ले।”
“हम्म” मैंने जवाब दिया।

राजीव बोले, “वीडियो कॉल करूं क्या?”
तो मैंने मना कर दिया।
मुझे अब सोना था।

मैं फिर से सो गई।
मेरी आंख अगली सुबह 5.30 बजे खुली।

अब मैं बिल्कुल ठीक महसूस कर रही थी।
खुश भी थी।

राजीव को गए आज नौवां दिन था।
मैं नहा धोकर पूजापाठ करके अपने नित्य कर्म निपटाकर ऑफिस के लिए निकल गई।

सारा दिन मैंने बहुत मन से अपने काम निपटा।
शाम को 6 बजे तक अपने घर भी आ गई।

गौरव के दिन में तीन कॉल आ चुके थे।
पर मैंने एक बार भी उससे बात नहीं की।

घर आकर मैंने अपने लिए चाय बनाई और गौरव को कॉल लगाया।
पहली ही घंटी पर उसने फोन उठा लिया और बोला, “आपकी तबीयत ठीक है न?”
मैंने “हां” में जवाब दिया।

“मैं आ जाऊं?” गौरव बोला।
मैंने कहा- आज रात का प्लान करेंगे, पर ऐसे मत आना। मैं तेरी मम्मी को कहूंगी, जब वो तुझे बोलेंगी तभी आना!
और फोन काट दिया।

मैंने नैना भाभी को कॉल लगाया।
उधर से भाभी की आवाज आई, “कैसी तबियत है अब?”
मैंने थोड़ी हल्की सी आवाज के बोला, “पहले से बहुत बेहतर हूं। पर अभी आराम की जरूरत है। कमजोरी महसूस हो रही है।”

“तूने कल से दवाई भी नहीं ली न?” भाभी गुस्सा करते हुए बोली।
मैंने कहा, “अकेले घर में मन नहीं लगता। कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती। इसीलिए मैं डाक्टर के पास भी नहीं गई।”

“मैं अभी 7 बजे तक गौरव को भेज देती हूं, तू उसके साथ डॉक्टर के पास चली जा दवाई ले ले, और रात को गौरव वहीं रुक जाएगा, तेरे घर ही। तुझे अकेलापन भी नहीं लगेगा।” भाभी बोली।
मैंने मुस्कुराते हुए “ओके भाभी” बोला और फोन कट कर दिया।

समय बहुत कम था।
मैं तेजी से उठी और नहाने चली गई।
नहा कर मैंने एक सेक्सी सी ब्रा पहनी और साथ में मिडी।

दरवाजा खुला रखकर मैं अपनी रसोई में खाना बनाने चली गई।

आज गौरव के लिए मैं अपने हाथ से खाना बनाना चाहती थी।
मैंने आलू गोभी की सब्जी और साथ में चपाती बनाई।
गौरव के लिए स्पेशल सूजी का हलवा भी बनाया।

7.10 पर घंटी बजी।
मैं समझ गई कि ये गौरव ही आया है।

मैंने रसोई से ही आवाज लगा कर बोला, “दरवाजा खुला है अंदर आ जा।”
गौरव ने अंदर आ कर दरवाजा बंद कर लिया।

वो मेरे पास रसोई में ही आ गया। मेरा चिकना गोरा बदन हरे रंग की मिडी में दमक रहा था।
गौरव आते ही पीछे से मुझसे चिपक गया और मेरी गर्दन पर बेतहाशा चुम्बन करने लगा।

मैंने गौरव को पीछे हटाते हुए नहा कर आने को बोला।
वो तुरन्त वॉशरूम में गया और नहा कर 5 मिनट में ही सिर्फ अंडरवियर बनियान में ही बाहर आ गया।
मैं तो अभी उसके लिए हलवा ही बना रही थी.

नहा कर आते ही वो मेरे पास नीचे फर्श पर बैठ गया और मेरी टांगें चाटने लगा।
मुझे गौरव का यह स्टाइल बहुत अच्छा लगा.
उसकी शर्म अब मिट चुकी थी।

मैंने उसकी तरफ देखा और अंडरवियर और बनियान भी उतारने को बोला।
वह नंगा हो कर मेरे पास आया.

मैंने उसको बराबर में रसोई की स्लैब पर बैठने का इशारा किया।
वो मेरे बराबर में वहीं बैठ गया, उसका लंड थोड़ा थोड़ा तनाव में था।

मैं एक हाथ से हलवा हिला रही थी।
दूसरे हाथ से गौरव के लंड पर थोड़ा सा तेल डाल कर वहीं उसको सहलाना शुरू कर दिया।

गौरव की तो सिसकियां निकलने लगी।
मैं गौरव के लंड को बहुत हल्के हाथ से सहला रही थी।

गौरव भी आह…आह… की आवाज के साथ हाथ बढ़ा कर मेरी ड्रेस के ऊपर से ही मेरी चूची दबाने की कोशिश करने लगा।
कुछ ही सेकंड में गौरव के लंड में अपना पूरा आकार ले लिया।

मैंने पास में पड़े नैपकिन से गौरव के लंड के ऊपर लगा तेल बिल्कुल साफ कर दिया।

फ्रिज में से शहद निकल कर अपनी उंगली से गौरव के लंड पर चुपड़ दिया।

हलवा बन कर तैयार था।
मैंने गैस बंद की और गौरव की तरफ मुंह करके अपके लंड पर लगे शहद को चाटने लगी।
गौरव इतना उत्तेजित था कि मेरा सिर पकड़ कर अपने लंड पर दबाने लगा ताकि उसका लंड पूरा मेरे मुंह में चला जाए।

ऊपर से तो मेरा सर पकड़ कर अपने लंड पर दबा रहा था साथ ही नीचे से अपने चूतड़ भी उछालने की कोशिश कर रहा था।

थोड़ी देर तक गौरव का लंड चाटने के बाद मैं वहां से बाहर डायनिंग हॉल में आ गई।
मैंने पहले से ही डिनर वहां लगा रखा था।

मैंने दोनों के लिए डिनर परोसना शुरू कर दिया।
गौरव पीछे पीछे मेरे पास आ गया और मेरी चूचियों के दबाने लगा।

वो बार बार मेरी ड्रेस उतारने की कोशिश कर रहा था।
मैंने बोला- पहले खाना खा ले।
वो बोला, “मैं नंगा बैठा हूं और आप कपड़ों में, ये तो नाइंसाफी है।”
मैंने उसको आश्वस्त किया, “आज सारी रात हम नंगे ही रहेंगे। अभी साथ में बैठ कर खाना खा ले।”

अनमने मन से उसने मेरी बात मान ली।
वो मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठा था।

मैंने खाने की थाली अपने हाथ में पकड़ी और हम दोनों के बीच से टेबल हटा दी।
अब हम दोनों आमने सामने ही बैठ कर खा रहे थे।

मैंने सामने कुर्सी पर अपनी टांगें फैलाकर पैरों से उसके लंड को सहलाना शुरू किया।
मैं तो तसल्ली से खाना खा रही थी पर वो बेचारा तड़प रहा था।
उसका तड़पना मुझे बहुत उत्तेजित करने लगा।

उसने तो बस एक चपाती ही खाई और बोला, “मेरा तो हो गया।”
मुझे भी ज्यादा भूख नहीं थी।
मैं बर्तन उठा कर रसोई में रख आई।

गौरव भी मेरे पीछे पीछे आ गया. मैं रसोई में बर्तन कर रही थी।
उसने पीछे से मेरी मिडी ऊपर करके मेरी पैंटी नीचे कर दी।

अब मेरी गांड उसके सामने नंगी थी।

इधर मैं तो बर्तन धो रही थी, उधर वो मेरी नंगी गांड चाटने में लगा था।

चाटते चाटते कभी कभी वो अपनी जीभ मेरी गांड के छेद में डालने की कोशिश करता तो मैं चिहुंक जाती।
बर्तन धो कर मैं उसकी तरफ मुड़ी तो वो भी खड़ा हो गया।

उसने जबरदस्ती करके मेरी मिडी उतार दी।
अब मैं सिर्फ एक सेक्सी सी ब्लैक कलर की ब्रा में उसके सामने थी।
मेरा गोरा बदन उस काली ब्रा में दमक रहा था।

वो पागलों को तरफ ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों से खेलने लगा।
पर आज मुझे कोई जल्दी नहीं थी, मैं मजा लेना चाहती थी।

घड़ी में 9 बजने वाले थे।
मैंने दो बॉउल में हलवा परोसा और बाहर सोफे पर आ गई।
गौरव भी पीछे पीछे वहीं आ गया।

मैंने अपनी उंगली में हलवा लगाया और गौरव को ऑफर किया।
वो मेरी उंगली चाट चाट कर हलवा खाने लगा।

मैंने सारा हलवा उसको अपनी उंगली से ही खिलाया।
वो तो बस मेरी चूचियों में ही व्यस्त था।

हलवा खत्म होते ही उसने बढ़कर मेरी ब्रा पीछे से खोलने की कोशिश की.
तो मैंने रोक दिया।
मैंने उसको समझाया कि थोड़ी देर में राजीव का कॉल आने वाला है कोई भी हरकत उसके बाद ही करेंगे।
वो पैर पटकने लगा।

मैंने उसको थोड़ी देर बाहर हाल में ही बैठने को बोला ताकि मैं अपने कमरे में जा कर राजीव से बात कर सकूं।

कमरे में जा कर मैंने राजीव को कॉल किया।
उन्होंने हमेशा की तरह पहली घंटी पर ही फोन उठा लिया।
थोड़ी सी दिनचर्या की बात करने के बाद उन्होंने मुझसे गौरव के बारे में पूछा तो मैंने अपना आज का पूरा प्लान बताया।

राजीव बोले, “मुझे वीडियो कॉल कर लेना मैं भी देखूंगा।”
तो मैंने मना कर दिया और बाय बोल कर फोन काट दिया।
मैं नहीं चाहती थी कि उस दिन की तरह गौरव मेरा इंतजार करके सोने चला जाए।

मैं लौट कर बाहर हाल में आ गई।
गौरव सोफे पर नंगा ही लेटा हुआ था।
अब तक उसका लंड भी मुर्झा चुका था।

मुझे बाहर आती देखकर गौरव तुरंत उठ कर मेरे पास आया, मुझसे लिपट गया।
मैंने भी आज खुद को पूरी तरह से गौरव के हाथ में सौंपने का निर्णय किया।

वो मुझे खींचकर डायनिंग टेबल की तरफ ले जाने लगा।
मैं भी उस तरफ ही चल दी।

डायनिंग टेबल पर जा कर उसने मुझे वहीं टेबल पर आगे की तरफ झुका दिया।
और फिर पीछे खड़ा हो कर मेरी गांड का छेद चाटने लगा।
मुझे गुदगुदी हो रही थी।

मैंने हंसते हुए पूछा, “कहां से सीखा ये?”
पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।
वो तो बस मेरे दोनों चूतड़ और उनके बीच के छेद से खेलने में मस्त था।

मैं भी अपनी गांड हिला हिला कर उसका साथ देने लगी।
मैंने पीछे की तरफ झांक कर देखा गौरव की लुल्ली फिर से लौड़े में तब्दील होने लगी थी।

मैंने गौरव का एक हाथ पकड़ कर गांड की नीचे अपनी चूत के छेद पर रख दिया।
गौरव भी नीचे हो कर मेरी चूत चाटने लगा।
फिर वो मेरी बाईं टांग को चाटते चाटते नीचे पैर तक गया और दाईं टांग को चाटते हुए फिर ऊपर तक आया.

अचानक उसने मेरी पीठ पर हाथ फेरा और एक झटके में मेरी ब्रा का हुक खोल दिया।
मैं तो पहले ही आगे की तरफ झुकी हुई थी, ब्रा खुलते ही मेरी चूचियों खुद ही नीचे की तरफ झूलने लगी।

मुझे लगा कि अब गौरव मेरी चूचियों से खेलेगा।
पर तभी अचानक उसने अपना कड़क हो चुका लंड पकड़ा और पीछे से मेरी चूत के मुहाने पर लगा कर एक ही झटके के पूरा अंदर उतार दिया कमीने ने!
आह्ह ईईइ…ई… ई… ई… मेरी चीख निकली।

“धीरे कर जानवर!” मैंने उसको बोला।
पर मैंने फील किया कि वो तो चोदते टाइम कुछ बोलता ही नहीं, बस पूरी मेहनत से लगा रहता है।

गौरव ने दोनों तरफ हाथ बढ़ा कर दोनों तरफ से मेरी दोनों चूचियां अपने हाथों में भर ली और पीछे से थप थप को आवाज के साथ जोर से धक्के मारने लगा।
उसकी सीधी चोट मेरे चूतड़ पर लग रही थीं और लंड अंदर बच्चेदानी तक टकरा रहा था।

गौरव का जोश सातवें आसमान पर था।
मैं भी अपने चूतड़ उचका उचका कर उसका साथ देने की कोशिश कर रही थी।

गौरव के धक्कों की गति धीरे धीरे बढ़ने लगी।
सेक्स विद वर्जिन बॉय का मजा लेते हुए मेरा पूरा बदन पसीने पसीने होने लगा।

गौरव ने मेरी चूचियों को छोड़ कर अब दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया और जोरदार झटके मारने लगा।
मैं भी गौरव के धक्कों में पूरा साथ दे रही थी।

कुछ झटकों के बाद वो अचानक रुक गया।
मुझे अपने अंदर गौरव का लावा गिरता हुआ महसूस हुआ।

गौरव वहां से हटने की कोशिश करने लगा तो मैंने हाथ पीछे करके उसको थोड़ी देर रुकने का इशारा किया।

कुछ सेकेंड बाद ही गौरव को पीछे से हटाया।
मैं और गौरव दोनों ही एक साथ वॉशरूम में चले गए।

अपने सभी अंग धो कर साफ करके फिर से हाल में आ गए।
रात को 10.30 बजने वाले थे।

मैंने रसोई में हम दोनों के लिए दूध बनाया।
गौरव भी मेरे पीछे पीछे वहीं आ गया और मेरे बराबर में खड़ा हो कर मेरी चूचियों से खेलने लगा।

पर मैं अब थोड़ा थक गई थी; मुझे थोड़ी देर आराम करना था।
मैंने दूध पीकर गौरव को सो जाने को बोला।
तो वो एक बार और की जिद करने लगा।

मैंने समझाया कि सुबह करेंगे अभी सो जा।

हम दोनों मेरे बिस्तर पर नंगे ही चिपक कर सो गए।

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