प्यासी भाभी को निरोध लगाकर चोदा

Views: 10 Category: Koi Mil Gaya By rkyoman7 Published: July 23, 2026

हार्ड फक भाभी स्टोरी में ऑनलाइन बनी दोस्त लड़की की सेक्सी अम्मी को निरोध लगा कर कई बार चोदकर उसकी बदनसीबी दूर की और जिंदगी में कुछ पल के लिये ही सही मगर मस्ती भर दी।

मेरी आपबीती को कहानी के रूप में पढ़ने वाले सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार!

आपके सामने प्रस्तुत किया था।

मेरी दोनों कहानियों को आप लोगों ने बहुत सराहा, तो कुछ दोस्तों को शिकायत यह भी है कि कहानी में उत्तेजक व भद्दे शब्दों का उपयोग कम होने से उत्तेजना नहीं होती है।
मैं आपसे क्षमाप्रार्थी हूँ कि कहानी में अश्लील शब्दों का प्रयोग कम होता है, लेकिन मेरी पूरी कोशिश होती है कि मैं घटना के समय के भावों को शब्दों के माध्यम से आपको सार्थक रूप से दिखा सकूँ।

आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि मेरी कहानी के भावों को कई महिलाओं ने समझा और मेल के माध्यम से मुझसे संपर्क करके कहानी को सराहा भी, तो कुछ ने मेरे साथ नया अनुभव भी किया।
उनके विश्वास और प्रेम के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

पिछले 12 सालों में मेरा सेक्स अनुभव 38 से बढ़कर 52 हो चुका है, जो मेरे जैसे सामान्य दिखने वाले इंसान के लिए सौभाग्य की बात है।

मेरी कहानी पढ़ने के बाद मेल के माध्यम से मेरी एक महिला मित्र बनी जिसका नाम गुलनाज था।
उसकी उम्र 18 साल की थी और वह मेरे शहर के एक स्कूल में 12वीं की छात्रा थी।

यह हार्ड फक भाभी स्टोरी इसी लड़की के कारण बनी.

उसके मन में सेक्स के प्रति बहुत जिज्ञासा थी।
रात में वह मुझसे ऑनलाइन मिलकर सेक्स संबंधित जानकारी लिया करती थी।
अपना समझकर एक दिन उसने अपने दिल की बात बोली कि उसे स्कूल का एक लड़का ‘फैजान’ बहुत पसंद है और दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं।

वे दोनों सेक्स करना चाहते हैं, लेकिन गुलनाज डरती है कि कुछ गलत न हो जाए और अगर गर्भधारण हो गया तो घर-परिवार की बहुत बदनामी होगी।

मैंने उसे सलाह दी कि वे अपने परिवार में बात करके शादी कर लें और सेक्स का आनंद लें.
लेकिन वे अभी शादी नहीं करना चाहते थे।

फिर मैंने उन्हें सलाह दी कि वे सेक्स के दौरान निरोध (Condom) का उपयोग करें।

उसने कहा, “क्या आप मुझे निरोध लाकर दे सकते हैं?”

मुझे लगा कि उनकी मदद करनी चाहिए और मैंने ‘हाँ’ बोल दिया।
अगले दिन हमारी मुलाकात एक मॉल में हुई।

कॉफी शॉप में एक लड़की—5 फुट 4 इंच लंबी, दूध जैसी गोरी, सामान्य उभरे हुए बूब्स और कटीले नैन-नक्श वाली—पिंक टी-शर्ट और ब्लू जींस में मेरे सामने आकर खड़ी थी।
मैं उसे देखता रह गया!

जब वह मुस्कुराई, तो उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों के बीच सफेद दाँत मोतियों की तरह चमक रहे थे।

कॉफी शॉप में पूरे टाइम उसने फर्स्ट टाइम सेक्स के लिए टिप्स लीं और फिर धीरे से मेरे हाथ से निरोध का पैक ले लिया।
वह बहुत उत्तेजित और उत्साह से भरी हुई थी।

उसने मुझसे कहा, “आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!”
मैंने कहा, “सही समय पर कर देना!”

और हम दोनों ने एक-दूसरे को विदा बोलकर वहाँ से अपने घर चले गए।

4 दिन बाद रात में करीबन 11 बजे मुझे गुलनाज का फोन आया।
वह रो रही थी।

मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसकी अम्मी को सब पता चल गया है और उसकी अम्मी को उसके पास से एक निरोध भी मिल गया है।
वह बहुत शर्मसार महसूस कर रही थी।

मैंने उसे समझाया कि तुमने कोई गलत काम नहीं किया है इसलिए शर्मिंदा मत हो और कोई गलत कदम मत उठाना।

तभी उसकी अम्मी ने फोन ले लिया और गुस्से में बोली, “क्या मिला मेरी बेटी की जिंदगी खराब करके?”

मैंने उसकी अम्मी से कहा, “कृपया आप नाराज न हों और गुलनाज को कुछ न कहें। वह आपके व्यवहार से डरी हुई है और कुछ गलत कदम भी उठा सकती है। क्या आप मुझसे कल मिल सकती हैं?”

उसने कहा, “जरूर मिलना चाहूँगी!”

अगले दिन मॉल के बाहर मैं इंतजार कर रहा था.
तो देखा कि गुलनाज के साथ एक 38 साल की औरत कार से उतर रही थी।

वह भी गुलनाज के जैसे नैन-नक्श वाली ही दिखती थी।
मैं समझ गया कि यही उसकी ‘संतूर’ से नहाने वाली अम्मी है।

वे दोनों मेरी तरफ आ रही थी कि तभी एक आदमी ने उनको पीछे से आवाज दी।

वह आदमी लगभग 50 या 53 साल का, मोटी तोंद वाला था और उसका दादा लग रहा था।
उसने कहा, “एक घंटे में वापस आ जाना, यहीं मिलेंगे!”

वह कार लेकर चला गया और हम तीनों कॉफी शॉप में साथ बैठे।

गुलनाज की अम्मी ‘आशिया’ गुलनाज से भी खूबसूरत थी और गुस्से में उसकी आँखें और भी नशीली लग रही थीं।

उसकी अम्मी बोली- घर का मामला है और पब्लिक में बात नहीं कर सकते। मेरे हब्बी ने सिर्फ एक घंटे का टाइम दिया है।
मैंने पूछा, “क्या वो दादा जी आपके शौहर हैं?”

इतना सुनते ही गुलनाज हँस पड़ी और आशिया के चेहरे पर भी थोड़ी सी हँसी आई लेकिन उसने अपना गुस्सा फिर से बरकरार कर लिया।
हम लोग नीचे पार्किंग में जाने लगे और उसकी अम्मी की जली-कटी बातें सुनने के लिए अपनी कार को बेहतर समझा।

उसकी अम्मी का गुस्सा बंद कार में फूट पड़ा और वह मुझे बहुत भला-बुरा कहने लगी।
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि यही काम करने में अगर उस बच्ची से गलती हो जाती, तो ये लोग कहाँ चेहरा दिखाते?
भलाई का जमाना ही नहीं है।

उसकी अम्मी ने बोला, “अब गुलनाज से दूरी बना लो और हमें हमारे हाल पर छोड़ दो!”

तब मैंने उसकी अम्मी से कहा, “आशिया जी, आप अपनी बदनसीबी को अपनी बेटी पर क्यों थोप रही हो? खुद तो सेक्स का सुख भोग नहीं पा रही हो और चाहती हो कि बेटी भी वह सुख न भोग पाए!”

मेरी बात सुनते ही आशिया के चेहरे की हवाइयाँ उड़ गईं।
मैंने आगे कहा, “आपकी किस्मत खराब है तो क्या अपनी बेटी की भी खराब करना चाहती हो?”

फिर मैंने गुलनाज और फैजान की पूरी कहानी सकारात्मक रूप से सुनाई तो आशिया का गुस्सा कुछ कम हुआ।

“जवानी के जोश में बच्चे कुछ गलत कदम उठा लेते तो आपको खुशी होती?”
मेरे सवाल का जवाब उसके पास नहीं था।

मैंने समझाया कि फैजान अच्छे घर का लड़का है और आपकी बेटी और वह दोनों एक-दूसरे को चाहते हैं, आप क्यों ‘अमरीश पुरी’ बन रही हो? आपकी बेटी समझदार है, उसे अपना रास्ता खुद चुनने दो। प्यार की ताकत है दोनों के बीच और वे दोनों सही रास्ते पर हैं।

फिर हम वहाँ से चले आए।

तकरीबन एक साल बाद गुलनाज का फोन आया और उसने बताया कि उसने और फैजान ने NEET की परीक्षा पास कर ली है और दोनों दिल्ली जा रहे हैं आगे की पढ़ाई करने।
मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई।

तभी फोन पर आशिया की आवाज आई।
उसने कहा, “मैंने अपनी बदनसीबी को अपनी बेटी पर हावी नहीं होने दिया। आपका शुक्रिया जो आपने उनके प्यार की ताकत को समझा। आपसे एक बात पूछनी है!”
मैंने कहा, “कहिए!”

वह बोली, “आपको कैसे पता चला कि मैं बदनसीब हूँ?”
मेरा जवाब था, “बदनसीब आप नहीं, आपके शौहर हैं, जिनके पास हूर जैसी बेगम है और वे उसे संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं!”
वह जोर से हँसी और बोली, “क्या आपको यह भी पता है कि बीमारी क्या है? तो फिर इस बीमारी का इलाज क्या है?”

मुझे आशिया बहुत पसंद थी और उसकी बातों से लग रहा था कि वह अब गुस्सा नहीं है।
तो मैंने उसे एक कप कॉफी के लिए आमंत्रण दिया।

उसने कहा- कल गुलनाज और उसके अब्बा दिल्ली जा रहे हैं, तो उनके जाने के बाद शाम को मिलते हैं।
मुझे लगा कि यह जंगली बिल्ली अचानक पालतू कैसे हो गई!

शाम को हम कॉफी शॉप में मिले।
आज आशिया सफेद रंग का सूट और गुलाबी दुपट्टा पहनकर आई थी।

पहली बार वह बिना गुस्से के मुस्कुराकर मिली।
वह बहुत खुश थी कि उसकी बेटी सही रास्ते पर थी।
हमने कॉफी पी और फिर डिनर करने चले गए।

कार में बातों-बातों में उसने बताया कि उसने मेरी दोनों कहानियाँ पढ़ी हैं।
उसने कहा, “आप अनुभवी हैं, तो मेरी बीमारी का इलाज भी बता दो!”

मुझे अहसास हुआ कि वह मेरे साथ हसीन लम्हा बिताना चाहती है।
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में थामा और उस पर एक चुम्बन ले लिया।

चुम्बन के समय देखा कि उसने उस अहसास को दिल से महसूस किया और अपनी आँखें बंद कर लीं।

यह सही मौका था।
मैंने अपनी गाड़ी को सड़क के किनारे कुछ अँधेरे में लगाया और फिर आशिया के गालों को सहलाया।
उसने आँखें बंद रखीं और गहरी साँस ली।

मैंने उसके गाल को चूम लिया, उसने कोई विरोध नहीं किया।
उसने कहा, “कुछ मत करो प्लीज, मुझे घर छोड़ दो!”

मैंने उत्तेजना दिलाने के लिए उसके बूब्स को ऊपर से दबाया।

दो बार दबाने पर भी उसने मना नहीं किया और फिर अचानक मेरा हाथ हटाकर बोली, “यह सड़क है। तुम्हें डर नहीं लगता? मुझे घर छोड़ो चल के!”

यह सुनकर मैंने उसे छोड़ दिया और उसके घर तक उसे छोड़ने चला गया।
आशिया का घर बहुत आलीशान और शहर के रईस इलाके में था।

मैं कार लेकर उसके घर गया, दरवाजे पर उसे उतारा तो बोली, “पानी तो पी लो अंदर आकर! आज घर में कोई नहीं है, तो कोई दिक्कत नहीं है।”

मैं समझ चुका था कि इशारा किस ओर जा रहा है और मुझे कौन सा ‘पानी’ पीना है।

अंदर जाते ही हम दोनों रसोई की तरफ गए।
उसने फ्रिज से ठंडा पानी निकाला कि तभी मैंने पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया।
उसके उभरे हुए नितम्बों पर अपना खड़ा लौड़ा सटा दिया।

वह कुछ नहीं बोली और फ्रिज का दरवाजा बंद करके उससे चेहरा सटाकर चुपचाप खड़ी रही।

मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए आगे की तरफ बढ़ने लगे।
दायाँ हाथ ऊपर उसके बूब्स की तरफ तो बायाँ हाथ नीचे उसकी चूत की तरफ जाने लगा।

वह गहरी-गहरी साँसें लेने लगी।
एक हाथ से भाभी का बूब्स ब्रा के ऊपर से दबाया और एक हाथ से उसकी चूत को सहलाया।
उसकी आवाज निकली, “ऊऊह्ह…!”

उसके बूब्स सहलाते हुए मैंने ब्रा का हुक खोल दिया और दूसरे हाथ से सलवार का नाड़ा।
नाड़ा और ब्रा के खुलते ही दोनों हाथों से उसके बूब्स पकड़ लिए और निप्पल को चुटकी में लेकर जब दबाया, तो उसकी सिसकी निकल गई, “सीई ईईई….!”

उसने अपने दोनों हाथ फ्रिज के दरवाजे के ऊपर रखे और गिरती हुई सलवार को नहीं रोका।
सलवार के गिरते ही उसके बूब्स को सहलाते हुए मेरे हाथ उसकी कमर पर वापस आए और उसकी पेंटी को नीचे करने लगे।

आशिया ने कोई विरोध नहीं किया और अपनी पेंटी को भी उतरने दिया।
अब उसकी गांड और चूत साफ़ दिख रहे थे।

उसकी चूत इतनी चिकनी थी जैसे उसने आज बैटिंग के लिए सुबह ही पिच तैयार की हो।

मैंने पीछे से एक उँगली उसकी चूत में डाली, तो चूत पहले से ही गीली हो रही थी।
बिना समय गँवाए मैंने अपना खड़ा लौड़ा पीछे से उसकी चूत पर लगाया, तो उसकी आह निकल गई, “हाआ आआ आआआ आ…!”

उसके शब्द थे, “हाय लला! तू तो सच में बड़ा कमीना है!”

उसके मुँह से यह बात सुनते ही मेरा जोश और बढ़ने लगा।
मैंने उसका कुर्ता और ब्रा उतार फेंका।

वह हूर बहुत सुंदर थी!
उसके बूब्स टाइट थे और 34D साइज था।
उभरे हुए नितम्ब और 36 की कमर कहर बरपा रही थी।

मैं बोला, “यार, मैं निरोध नहीं लाया!”
तो वह बोली, “मेरे पास है!”

उसने अपनी अलमारी से एक निरोध निकाला और कहा, “यह वही निरोध है जो तुमने मेरी बेटी को दिया था, आज उसकी अम्मी के काम आ रहा है!”

वह मेरे साथ सोफे पर आई, सामने बैठी और मेरे लौड़े को ठीक से देखने लगी, बोली, “क्या शानदार खड़ा लंड है! एक मुद्दत बीत गई खड़ा लंड हाथ में पकड़े!”

और उसने मेरे लौड़े को चूहा समझकर जंगली बिल्ली की तरह अपने मुँह में ले लिया।
लंड चूसते हुए उसने मेरी बॉल्स को भी चटा।

फिर लौड़े पर निरोध चढ़ाकर बोली, “आज मेरी बीमारी का इलाज कर दो!”
उसने दोनों पैर फैला दिए मेरे लंड के स्वागत में।

जैसे ही मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत के छेद पर रखा, उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।

उसकी चूत बहुत गीली थी और मेरा लौड़ा टाइट, तो उसकी चूत की दीवारों को चीरते हुए लौड़ा अंदर जाने लगा।
आशिया ने मुझे पूरे प्रेम के साथ अपनी बाहों में भर लिया और मेरा साथ देने लगी।

धीरे-धीरे मेरा लौड़ा उसकी चूत की गहराई नापने लगा।
उसकी सिसकियाँ बढ़ने लगीं।

अब जब आशिया भाभी ने अपनी आँखें खोलीं, तो उसकी आँखों में हवस थी।
लौड़े की रफ्तार के साथ-साथ उसकी आवाज भी बदलने लगी, “आह… आहह… आहा… कितना मस्त कर रहे हो तुम!”

मैंने उसके बूब्स दोनों हाथों में पकड़कर जोर से मसले, तो आवाज आई, “ऊओह्ह… यस… इसे ही…!”

मैंने पूछा, “क्या तुम्हें मियाँ जी के साथ मजा आया जितना आज आ रहा है?”
बोली, “कुत्ते! उसे याद मत कर… मेरी चूत को और जोर से चोदो!”

मैंने और तेज धक्के मारे।
चुदाई में आवाज आने लगी— ‘फट फट फट’
और आशिया की आवाज थी, “ऊउम्म्म… चोदो और जोर से… फाड़ दो आज मेरी चूत!”

लगभग 5 मिनट में उस भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और सीने से लगाकर चिपक गई।
उसके होंठ मेरे होंठों से चिपके हुए थे।

मैं समझ गया कि इसकी चूत का झरना फूट चुका है।
लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ था।
मैंने कुछ रुककर फिर से धक्के मारे।

वह नॉर्मल फील करने लगी जो मुझे पसंद नहीं था, तो मैंने उससे बोला, “घोड़ी बनो, पीछे से लूँगा!”
वह बोली, “गांड मत मारना मेरी!”

मैंने कहा, “यार, तेरा हो गया तो क्या मेरा नहीं होना चाहिए?”

वह घोड़ी बनी और मैं घोड़ी पर सवार हुआ।
उसकी कमर पकड़कर पीछे से हार्ड फक भाभी की चूत मारता रहा।
वह “अह्ह्ह… हाआ आआ आ” की आवाजें निकालती रही और इस बीच मेरा भी पानी आ गया।
निरोध में सारा पानी जमा हो गया और फिर हमारी चुदाई पूरी हुई।

उसके बाद हमें 4 मौके और मिले चुदाई करने के, जिसमें उसकी अलग-अलग आसन में चुदाई की और बचे हुए निरोधों का उपयोग किया।
उसने मुझे थैंक यू बोला और कहा, “तुमने मेरी भी बदनसीबी दूर कर दी। शादीशुदा हूँ इसलिए यह समाज की मजबूरी है, वरना जवानी का मजा तो मैं खूब लूटना चाहती हूँ!”

आप सभी दोस्तों से अनुरोध है, सेक्स के समय अपनी और अपने साथी की सुरक्षा के लिए निरोध जरूर प्रयोग करें।
आपको मेरी यह आपबीती हार्ड फक भाभी स्टोरी कैसी लगी, जरूर मेल करें:
rkyoman7@gmail.com

You May Also Like

सेक्स की भूख- 2
Views: 152 Category: Koi Mil Gaya Author: enjoysunny6969 Published: May 19, 2026

सेक्स ट्रिप विद वाइफ फ्रेंड का इंतजाम बीवी ने ही अपने पति के लिये किया. उसने अपनी सहेली को पति के लंड को मजा देने के लिए व…

वासना ना समझे उम्र के बंधन- 3
Views: 154 Category: Koi Mil Gaya Author: replyman12 Published: April 15, 2026

यंग एंड मेच्योर सेक्स की कहानी में 21 साल के लड़के को गर्म करके 36 साल की कुंवारी लड़की पहली बार चुद गयी. दोनों ने एक दूसरे …

Comments