दोस्त ने अपनी बीवी को चोदने को कहा- 1

Views: 188 Category: Brother-Sister By valmiks482 Published: April 07, 2026

हॉट वाइफ नो सेक्स कहानी में मेरे दोस्त की बीवी बहुत अच्छी थी. पर उसकी बीमारी के कारण वह बीवी को सेक्स नहीं दे पा रहा था. इसमें उसने मेरी मदद मांगी.

मेरा दोस्त मोहन असिटेंट के कारण अपनी बीवी के साथ सेक्स करने को असमर्थ हो गया था.
उसने अपनी बीवी को संतुष्ट करने का प्रस्ताव मुझे दिया.

यह सेक्स कहानी मेरे एक पाठक विजय की है और यह उसके जीवन कहानी पर आधारित एक सच्ची घटना है.

आप विजय की इस हॉट वाइफ नो सेक्स कहानी को उसी की जुबानी सुनें.

मैं विजय, एक फैक्ट्री में काम करता था.
उस फैक्ट्री में मेरी दोस्ती मोहन से हुई, हम दोनों इंजीनियर थे.

मोहन और मैं एक ही विभाग में थे, काम के सिलसिले में हमें फैक्ट्री में काफी चलना पड़ता था, हम दोनों शरीर से फिट थे.

उस समय हमारी उम्र 24 साल की थी.
उसी दरमियान मोहन की शादी हुई, शादी के बाद मोहन बहुत खुश था.

उसकी बीवी शालिनी छरहरे बदन की, गेंहुए रंगत की हंसमुख स्वभाव की महिला थी.
हालांकि उसे बहुत खूबसूरत तो नहीं कहा जा सकता, पर वह काफी अच्छी दिखती थी.

मोहन मुझसे अक्सर कहता था कि विजय शादी कर ले, जिंदगी का असली मजा आएगा.

मुझे बार बार सर्दी खांसी होती थी, मैं एक होमियोपैथिक डॉक्टर संगीता से अपना इलाज करा रहा था.
संगीता मुझे अच्छी लगने लगी, पर मैं उससे कहने में संकोच कर रहा था.

मैंने मोहन और शालिनी भाभी को संगीता से मिलवाया, उन्हें भी संगीता अच्छी लगी.
भाभी ने संगीता को मेरे मन की बात बताई, संगीता राजी हो गयी.

घर वालों की सम्मति से हमारी शादी हो गयी.
संगीता के पिताजी साधारण नौकरी करते थे, उन पर काफी जिम्मेदारी थी.

मैंने और संगीता ने विवाह के पूर्व कभी संभोग नहीं किया था इसलिए शादी के बाद करीब एक साल हम यौन क्रीड़ा और संभोग का आनन्द लेते रहे.
हम दोनों ही काफी खुश थे.

मेरा दो बेडरूम का फ्लैट था.
हम अक्सर मोहन और शालिनी भाभी के साथ हमारे घर में पार्टी करते.
पार्टी में शराब पी जाती, सेक्स संबंधी चुटकुले भी चलते, हम सब साथ में बैठकर सेक्स वीडियो भी देखते.

फिर जब जोश आ जाता, तो हम दोनों अपनी अपनी बीवियों के साथ बेडरूम में चले जाते.
मैं शालिनी भाभी को शालिनी कहने लगा. मोहन संगीता को उसके नाम से बुलाता.
हम चारों दोस्त हो गए थे.

मोहन ने मुझे बताया कि वह और शालिनी हर रोज सम्भोग करते हैं. छुट्टी के दिन तो सुबह ही शुरू हो जाते हैं. एक दूसरे की मालिश करते हैं, साथ नहाते हैं, बाथरूम में सेक्स करते हैं. जब शालिनी उसके लंड की सवारी करती है और मोहन को चूचे चुसवाती है, तब चुदाई में बड़ा मजा आता है.

मोहन ने मुझे सेक्स के नए नए आसन बताये.
मुख मैथुन के बारे में और गांड मारने के मजे के बारे में बताया कि वह शालिनी की गांड भी मारता था, शालिनी ख़ुशी से उसका साथ देती थी.

मैं इतना खुशकिस्मत नहीं था.

संगीता को सेक्स में मजा तो आता था पर वह सिर्फ मिसनरी पोजीशन में सेक्स करने देती थी.
वह मुख मैथुन, लंड की सवारी, घोड़ी बनना, लंड की सवारी, गांड मरवाने को राजी नहीं थी.

एक साल बाद संगीता मुझसे कहने लगी कि मुझे अपनी आमदनी बढ़ानी चाहिए.
उसने शादी के समय सोचा था कि इंजीनियर को मोटी तनख्वाह मिलती है.

मैं संगीता को समझाता, समय के साथ तनख्वाह बढ़ेगी.
पर संगीता गरीबी में बड़ी हुई थी, उसे जल्दी अमीर बनना था.
मैं दूसरी नौकरी ढूंढ़ने लगा, जिसमें तनख्वाह ज्यादा हो.

शादी के डेढ़ साल बाद मुझे दूसरे शहर में नौकरी मिली, तनख्वाह ज्यादा थी.
हम दूसरे शहर चले गए.

संगीता ने वहां अपना होमियोपैथिक क्लिनिक शुरू किया.
हमारी आमदनी बढ़ी, संगीता कुछ समय खुश रही, बाद में वह फिर से कम आमदनी की शिकायत करने लगी.

हमारे बीच झगड़े होने लगे.
संगीता अक्सर देर रात क्लिनिक से वापस आती.

वह अलग सोने लगी और मुझे अपना बदन छूने नहीं देती.

एक दिन मैंने गुस्से में कह दिया कि कम समय में अमीर बनने के लिए रिश्वत लेनी पड़ेगी, चोरी करनी पड़ेगी. मैं यह सब नहीं करूँगा, इससे अच्छा है कि हम लोग तलाक ले लें, तुम कोई अमीर पति ढूंढ लो.

ऐसा मैंने इसलिए कहा क्योंकि मैंने देखा था कि रात को संगीता क्लिनिक से एक अधेड़ आदमी की कार में आती थी.

संगीता शायद इसी बात का ही इंतजार कर रही थी.
उस ने कहा- हां तलाक ही ठीक रहेगा, मैंने अमीर पति ढूंढ लिया है.

हमने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी की.
हमें एक साल अलग रहना था.

संगीता अपने प्रेमी के साथ रहने चली गयी.
एक साल बाद हमारा तलाक हो गया.

अब मेरा अपने दोस्त मोहन से भी संपर्क नहीं था और पत्नी से भी अलग हो गया था.

तलाक के बाद मेरा मन इस शहर में नहीं लग रहा था.
मैंने अपनी पुरानी फैक्ट्री में अप्लाई किया, जहां मैं पहले काम करता था.
मुझे नौकरी मिल गयी.

फैक्ट्री ज्वाइन करने के बाद मोहन मुझे नहीं दिखा.
मैंने एक सहकर्मी से मोहन के बारे में पूछा.

सहकर्मी ने बताया कि मोहन को बस दुर्घटना में कमर में चोट लगी थी, वह वॉकर के सहारे चलता है.

वह एक साल बिस्तर पर था, थोड़ा ठीक हुआ तो कंपनी ने उसे काम पर ले लिया, पर छोटी पोस्ट पर पेपर वर्क के काम में लिया है.
वह ज्यादा देर काम नहीं कर सकता.

वह मुझे मोहन के पास ले गया.

मोहन कमजोर और बीमार दिख रहा था.
उसने फीकी मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किया.
उसने कहा- शालिनी से मिलना हो तो तुमको मेरे घर आना होगा.

मैं शाम को उनके घर गया.
शालिनी ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया, पर लगा उसकी मुस्कराहट नकली हो.

वह दुबली हो गयी थी, परिस्थिति और गरीबी ने उसकी सुंदरता छीन ली थी.
घर में सिलाई मशीन और कपड़े का अम्बार लगा था.

मोहन- मेरे एक्सीटेंट के बाद शालिनी ने सिलाई करके घर चलाया, इलाज में जमा पैसे खत्म हो गए, अब उसका इलाज सरकारी अस्पताल में हो रहा है. कंपनी ने दया कर उसे नौकरी तो दी, पर कम तनख्वाह पर. तुम सुनाओ कैसे हो और भाभी किधर हैं?

मैंने बताया कि उससे मेरा तलाक हो गया है, मैं कंपनी के गेस्ट हाउस में रह रहा हूँ. पर 10 दिन में मुझे फ्लैट ढूढ़ना है.

शालिनी चाय बनाने किचन में गयी, मोहन ने किचन में शालिनी से कुछ बात की.
उसने वापस आकर मेरी तरफ देखा.

मोहन- विजय तुम चाहो तो हमारे साथ रह सकते हो. हमारे घर में एक बेडरूम खाली है, घर का खाना मिलेगा. लगता है तलाक के बाद तुम दुखी हो गए हो.

मैंने सोचा कि मोहन के साथ रहूंगा तो मोहन को आर्थिक मदद भी दे सकता हूँ, मुझे अकेलापन भी नहीं लगेगा.

मैं- मुझे तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगेगा, पर मैं फ्लैट का आधा भाड़ा और हम तीनों के खाने का खर्चा दूंगा, तब भी वह मेरे होटल के खाने से सस्ता होगा और मेरी तबियत भी ठीक रहेगी.

मेरे समझाने से मोहन शालिनी राजी हो गए.
मैं उसी शाम उनके घर रहने आ गया.

शालिनी के बनाए खाने की मैं तारीफ करता और उसे व मोहन को खुश रखने की कोशिश करता.
शालिनी भी कोशिश करती कि मैं अपने तलाक को भूलकर खुश रहूं.

कुछ दिनों तक शालिनी बुझी बुझी रही, पर धीरे धीरे खुश रहने लगी.

घर की आर्थिक अवस्था सुधरी पर मोहन उदास ही रहा.
वह कहता- मैं शालिनी के ऊपर बोझ बन गया हूँ, उसे खुश नहीं रख पा रहा हूँ.

छुट्टी के दिन मैं शालिनी के साथ बाजार जाता, तो मुझे लगता मैं अपनी पत्नी के साथ बाजार गया हूँ.
कोई परिचित मिलता तो शालिनी कहती- ये मेरा देवर है.

मैं और शालिनी मोहन को लेकर बड़े डॉक्टर के पास गए.
उन्होंने कुछ कसरतें बताईं, पर यह भी कहा कि ठीक होने में काफी समय लगेगा.

मैं शालिनी के साथ मोहन को कसरत करवाता, कसरत कराते समय मेरा बदन शालिनी के बदन को छूता, तो मुझे अच्छा लगता.

शालिनी भी दूर हटने की कोशिश नहीं करती.

मोहन- विजय, शालिनी को सिनेमा देखना बहुत अच्छा लगता है, मैं ज्यादा देर बैठ नहीं सकता. तुम शालिनी को सिनेमा ले जाना.
मैं राजी हो गया, शालिनी भी ख़ुशी से राजी हो गयी.

मैं और शालिनी सिनेमा देखने गए, मैंने सबसे पीछे वाली सीट बुक की थी.
सिनेमा वयस्कों की थी और उसमें काफी रोमांटिक सीन थे.

हमारे बीच के चेयर के हैंड रेस्ट पर मेरा हाथ शालिनी के हाथ को छू रहा था.
शालिनी ने हाथ नहीं हटाया.

मैंने हिम्मत कर शालिनी का हाथ पकड़ लिया, उसने विरोध नहीं किया.

जब कोई सेक्स से भरा सीन आता, शालिनी मेरा हाथ दबा देती, उसकी सांसें तेज हो जातीं.

हम जब वापस घर आए तो शालिनी खुशी से चहक रही थी.
मोहन ने उसे खुश देखकर मुझे धन्यवाद कहा.

मैं शालिनी के प्रति यौन आकर्षण महसूस कर रहा था.
मैं दुविधा में था कि यदि मैंने शालिनी से शारीरिक संबंध बनाए, तो वह मोहन के साथ धोखा होगा.

मैं यह भी महसूस कर रहा था कि शालिनी को भी यौन आनन्द की जरूरत है.
उसी हफ्ते दशहरा निकला था और 15 दिन बाद दीवाली आने वाली थी.

मैं- हम तीनों इस बार दीवाली धूमधाम से मनाएंगे.
शालिनी तुरंत राजी हो गयी, मोहन ने हामी भरी.

मैं और शालिनी दीवाली के लिए कपड़े आदि खरीदने गए, शालिनी ने साड़ी खरीदते समय मेरी सलाह ली.
हमने दीवाली मजे से मनाई.

शालिनी पुराने दिनों की तरह खुश दिख रही थी.
नयी लाल साड़ी में शालिनी बहुत खूबसरत लग रही थी, मेरी नज़र उससे नहीं हट रही थी.

शालिनी ने मेरा हाथ पकड़ कर फुलझड़ी जलाई.

दूसरे दिन मोहन बोला- विजय पुराने दिनों की तरह आज रात शराब पार्टी हो जाए?

दीवाली की छुट्टी खत्म होने में चार दिन बाकी थे.
मैं व्हिस्की ले आया.

शाम को शालिनी ने टेबल सजा दी और कहा- तुम दोनों पियो, मैं बाद में ज्वाइन करती हूँ … मुझे किचन में काम है.
मोहन ने लार्ज पैग बनाए, हमने पहला पैग ख़त्म किया, एक ही पैग में अच्छा खासा नशा हो गया था.

मोहन- शालिनी, पार्टी के बाद आइसक्रीम हो जाती तो और मजा आ जाता.
शालिनी- मैं लेकर आती हूँ, बस 15 मिनट लगेंगे.

शालिनी के जाते ही मोहन ने अपने दिल की बात कहना शुरू कर दी.

मोहन- विजय मैंने शालिनी को जानबूझ कर बाहर भेज दिया है. मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है.
मैं बोला- बिना संकोच कहो.

मोहन- तुम्हारे आने से शालिनी 3 साल बाद खुश दिख रही है, तुमने उसे ख़ुशी दी. तुम्हें तो मालूम है कि मैं और शालिनी कितना सेक्स एन्जॉय करते थे, पर मैं अब कमर के दर्द के कारण सेक्स करने में असमर्थ हूँ. शालिनी सेक्स के लिए तरसती है.

यह कहकर मोहन मुझे अपने बेडरूम में ले गया.
ड्रावर खोलकर उसने एक मोटी मोमबत्ती निकाली.

उसे मेरे हाथ में देकर उसने कहा कि जब शालिनी को लगता है कि मैं सो गया हूँ, तब वह इससे अपनी कामवासना पूरी करने की कोशिश करती है.
मैंने देखा कि मोमबत्ती में तेल लगा था.

मोहन- मेरा प्रस्ताव है कि तुम शालिनी की सेक्स की जरूरत पूरी करो, अपनी पत्नी मानकर उसे शारीरिक सुख दो. जल्दी से हां कहो, शालिनी आने ही वाली है.
मैं- मोहन तुम क्या कह रहे हो, शालिनी तुम्हारी पत्नी है?

मोहन- मेरा कर्तव्य है शालिनी को खुश रखना. मैं उसे खुश नहीं रख पा रहा हूँ इसलिए निराश हूँ. तुम राजी हो जाओ तो मुझे निराशा से मुक्ति मिलेगी. डॉक्टर ने कहा है यदि मैं खुश और आशावादी रहूं, तो मेरी ठीक होने की संभावना ज्यादा है.

मैं- मैं राजी भी हो जाऊं, तो क्या शालिनी राजी होगी? जब तुम ठीक हो जाओगे तब क्या होगा?

मोहन- मैं शालिनी को समझाऊंगा. यदि मैं ठीक हो भी गया, तो शालिनी हम दोनों की पत्नी होगी.
मैंने हां कह दिया.

मोहन- शालिनी आने के बाद हमारे साथ पीने बैठेगी. शालिनी को झूठ बोलना नहीं आता, पीने के बाद वह अपने दिल की बात बता देती है. तुम एक पैग के बाद कहना तुम सोने जा रहे हो, ज्यादा चढ़ गयी है. खाना खाकर सोने चले जाना. मैं शालिनी को और शराब पिलाकर उससे सेक्स की बात करूँगा.

मैं राजी हो गया और मैंने वैसा ही किया.

मैं अपने बेडरूम में अंधेरा करके लेटा था.
शालिनी बेडरूम में आयी, मैंने आंख बंद कर ली.

शालिनी ने पास आकर देखा कि मैं सो गया हूँ … वह मुझे देख कर चली गयी.
मुझे मोहन शालिनी की बातें करने की आवाज़ आ रही थी, पर सारा मसला ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था.
मुझे नींद आ गयी.

दूसरे दिन मोहन ने बताया बहुत समझाने के बाद शालिनी राजी हो गयी है.

चाय नाश्ते के समय मोहन ने मुझसे और शालिनी से कहा- आज से तुम दोनों की नयी जिंदगी शुरू हो रही है, पति पत्नी की तरह एक बेडरूम में सोना.

शाम को मैंने अच्छे से शेविंग की झांट और कांख में बाल साफ़ किए.
डिनर के बाद मोहन बोला- मैं सोने जा रहा हूँ, तुम दोनों को आल द बेस्ट.

शालिनी ने मेरे बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बंद कर दिया, थोड़ी देर बाद उसने दरवाज़ा खोला और मुझे अन्दर आने का इशारा किया.
शालिनी ने लाल साड़ी पहनी थी, जो मैंने दीवाली के लिए उसके लिए पसन्द की थी.
मैंने अन्दर जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया.

शालिनी- मोहन ने तुम्हें मेरा दूसरा पति बना दिया, पर पत्नी वाली फीलिंग नहीं आ रही. तुम मेरी मांग में सिंदूर भरो तो मुझे लगेगा मैं तुम्हारी पत्नी हूँ.
यह कहकर उसने सिंदूर की डिब्बी मुझे दे दी.

मेरा भी प्लान था कि शालिनी से माला बदलकर शादी करूँगा, फिर सुहागरात मनाऊंगा.
मैंने फूलों की दो माला और गुलाब की पखुड़ियां बेडरूम में लाकर रखी थीं.

हम दोनों ने माला बदली, मैंने शालिनी की मांग में सिंदूर भरकर कहा- पलंग पर दुल्हन बनकर बैठो, हम दोनों सुहागरात मनाएंगे.
मैंने गुलाब की पखुड़िया पलंग पर फैला दीं.

शालिनी उत्साह के साथ पलंग पर घूँघट निकाल कर बैठ गई.
मैंने उसका घूँघट उठाया, सोने की चेन भेंट की.

मैंने शालिनी के मस्तक, आंख को चूमकर कहा कि मेरी दुल्हन बहुत सुंदर है.
मैंने शालिनी के होंठ चूमे, शालिनी ने चुम्बन का जवाब चुम्बन से दिया.

मैंने शालिनी को प्यार से लिटा दिया, उसकी गर्दन चूमते ब्लाउज के ऊपर से चूचे दबाने लगा.
शालिनी हल्की हल्की सिसकारी ले रही थी.

मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले, लाल ब्रा के बाहर निकले शालिनी के चूचों की घाटी चूमने लगा.
जब मैं ब्रा उतार रहा था, शालिनी ने खुद ही ब्रा को उतार दिया.

शालिनी के भरे गेहुंए चूचों पर भूरे रंग के निप्पल शानदार लग रहे थे.
मैं एक चूचे को दबा रहा था, दूसरे को चूस रहा था.

शालिनी शरारत से बोली- मेरे आधे कपड़े उतार दिए और खुद पूरे कपड़े पहने हो … यह नाइंसाफी है.
मैं तुरंत अपने कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया.

शालिनी के बाकी कपड़े भी उतार कर उसे नंगी कर दिया.
मैंने शालिनी की जांघ पर हाथ फेरते उसकी चूत पर हाथ फेरा.

उसकी चूत एकदम चिकनी थी, लगा उसने आज ही चूत के बाल साफ किए हैं … चूत गीली थी.
शालिनी मेरे लंड को सहलाने लगी.

हम दोनों बैचैन थे, शालिनी को 3 साल बाद सेक्स का मौका मिला था.
मैंने भी 3 साल मुठ मारकर काम चलाया था.

दोस्तो, इस हॉट वाइफ नो सेक्स कहानी में अभी आगे बहुत रस बाकी है. प्लीज मेरे साथ बने रहें और अपने विचार मुझे मेरी मेल पर जरूर भेजें.
मेल लिखते समय कृपया सेक्स कहानी के शीर्षक कर जिक्र अवश्य करें ताकि जबाव देने में सुविधा हो.
valmiks482@gmail.com

You May Also Like

Chota Bhai - 4
Views: 504 Category: Brother-Sister Author: RaatKiBaat Published: May 08, 2025

Kitchen mein mere aur chote bhai k alawa aur koi nahi tha sabhi bahar hall mein baithe baate kar rahe the. Chote bhai n…

CHUT CHATAI
Views: 403 Category: Brother-Sister Author: Garimasexy Published: July 14, 2025

मैंने एक पेड़ पर पीठ टिका दी और सोनू मेरे सामने वहीं घुटने के बल बैठ गया। अपनी पैण्टी निकाल कर मैंने ज्योति को पकड़ा दी और …

Comments