वर्जिन चूत Xxx कहानी में मेरी दोस्त जो अब मेरी गर्लफ्रेंड बन चुकी थी, मेरे साथ होटल के कमरे में सेक्स का मजा ले रही थी पहली बार.
दोस्तो, मैं अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर सेक्स कहानी लिख रहा था.
कहानी के पिछले भाग
अधूरी मुहब्बत को पूरी करने का मौक़ा
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि स्वाति मेरे साथ होटल के कमरे में थी और मेरे साथ फ़ोरप्ले कर रही थी.
अब आगे वर्जिन चूत Xxx कहानी:
अपनी चूचियों का मजा देने के बाद स्वाति ने जोर लगाया और मुझे पलट कर नीचे कर दिया.
वह खुद मेरे ऊपर आ गई.
उसने अपनी चूची पकड़-पकड़ कर मुझे पिलाना शुरू कर दी.
उस शर्मीली लड़की का ये अंदाज़ देखकर तो मैं आज पागल ही होने लगा था.
अचानक से वह मेरे ऊपर से उतरी, मेरे अंडरवियर को अपनी दांत से पकड़ कर नीचे खींच लिया.
मैंने भी कमर उठाकर मदद की तो उसने अंडरवियर उतार दिया.
उस वक्त स्वाति एकदम पोर्न एक्ट्रेस लग रही थी.
ऐसा लग रहा था कि न जाने वह कितनी खेली-खाई लौंडिया है.
वह मेरे अंडरवियर को लेकर ऐसे सूंघने लगी, जैसे कोई नशेड़ी हो और उसे मेरी चड्डी से कोई मादक नशा सूंघने को मिल रहा हो.
फिर वह उठी और अपना बैग ले आई.
उसने बिग के अन्दर से एक डिब्बा निकाला और उसे मेरे लंड पर उड़ेलने लगी.
उस खुशबूदार तरल पदार्थ से पता चला कि वह लिक्विड चॉकलेट है.
कुछ ही देर में स्वाति ने मेरे लंड और टट्टों को लिक्विड चॉकलेट से सान दिया था.
वह मेरे एक आंड को अपने मुँह में भरके चूसने लगी.
उसके चूसने के अंदाज से ऐसा लग रहा था, जैसे वह मेरे आंड को खा ही जाएगी.
चॉकलेट लगी होने के कारण वह पूरे वेग से मेरे दोनों आंडों को चूस रही थी.
आंड चूसने के उपरांत उसने मेरे लंड पर एक किस किया और उसे हाथ से मुठियाने लगी.
स्वाति उत्तेजित स्वर में बोली- हे मेरे लंडपति देव, मैं आपको अपनी चूत की गहराई से प्रणाम करती हूँ!
ऐसा बोलकर उसने पूरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
पूरे कमरे में मेरी सिसकारियां गूँज रही थीं- आआह्ह बेबी चूस ले लंड मेरा … आह तू तो मेरी पत्नी है … प्यार कर अपने पति को … खा जाओ पूरे लंड और आंड … उफ्फ़ मेरी जान, कितनी सेक्सी हो तुम … इतने सालों से मैं तुम्हें एक नासमझ लड़की समझता रहा, पर तुम तो अब मेरे बच्चों की मम्मी बनने लायक हो गई हो आई लव यू सेक्सी स्वाति!
उधर उसके लंड चुसाई की पुच-पुच, थूँ, हम्फ जैसी आवाजें कमरे के माहौल को और भी सेक्सी बना रही थीं.
लंड चूसने के बाद स्वाति ने मुझे उल्टा लेटने को बोला.
मैं लेट गया.
वह मेरी पीठ पर चॉकलेट गिराकर चाटने लगी, फिर कमर पर.
अचानक उसने मेरी चूतड़ों के बीच में चॉकलेट डाल दिया.
मैंने भी पैर फैलाकर गांड खोल दी.
वह किसी रंडी की तरह मेरी गांड की दरार में मुँह डालकर चॉकलेट खाने लगी.
जब भी उसकी जीभ मेरी गांड के छेद से टकराती, पूरा शरीर गनगना उठता.
करीब आधे घंटे तक उसने मेरे लंड, अंड और चूतड़ चाटे.
अब मैंने उसे नीचे लिटाया, उसकी पैंटी निकाल दी, फिर उसकी दोनों टाँगें हवा में उठाईं और चौड़ी कर दीं.
मैंने बिना देर किए उसकी नन्ही सी गीली चूत में अपना जीभ पेल दी और अन्दर घुसेड़ कर जीभ से चुत को कुरेदने लगा.
स्वाति थरथराते हुए बड़बड़ाने लगी और उसने उत्तेजना से चीखते हुए कहा- हां राजा जी, चाट कर खा लो मेरी चूत को … आपके लिए बहुत तड़प रही है ये … इसको आप अपने लंड से फाड़ दो आज!
दो मिनट से भी कम की चटाई में ही उसकी चूत से धार फूट पड़ी … अब वह अपने राजा जी का सर पकड़ कर चूत में धँसा ले रही थी.
स्वाति गंदी गालियों में चिल्लाई- साले भड़वे, मादरचोद चाट कर खा जा भोसड़ी के … साले एक बूंद भी खराब नहीं होना चाहिए वरना तेरी बहन चोद दूंगी … चाट साले रंडी की औलाद!
वह न जाने कौन सी और कितनी गंदी गालियां देती हुई भलभला कर झड़ गई.
अपनी चुत का सारा नमकीन माल मुझे पिलाने के बाद वह निढाल हो गई.
स्वाति के मुँह से इतनी गंदी गालियां सुनकर एक बार को तो मैं अवाक ही रह गया था लेकिन उसकी आंखों में वासना और प्यार का समुद्र देखकर मैं भी एकदम निहाल हो गया था.
अब मैं नहीं रुका.
मैंने चॉकलेट उसकी चूत में डाल दिए और फिर से उसे चाटने लगा.
करीब 5 मिनट बाद वह गर्म होने लगी और कमर उठा-उठाकर बुर चटवाने लगी.
मैं अपना लौड़ा उसकी चूत पर घिसने लगा.
वह तड़पने लगी और मेरा लंड पकड़ कर चूत में डालने की कोशिश करने लगी.
एक तो एकदम सील-पैक चूत, ऊपर से चूत के रस की चिकनाई और चॉकलेट का गीलापन … लंड भला जाए तो कैसे जाए उसकी चूत में?
मैं लंड पकड़ कर ऊपर आ गया, अपनी प्यारी रंडी का मुँह खुलवाया और पूरा लंड उसके मुँह में पेलने लगा.
करीब 7-8 मिनट उसके मुँह में चोदने के बाद मेरे लंड ने जवाब दे दिया.
मैंने अपना सारा वीर्य अपनी जानू के मुँह में खाली कर दिया.
मैंने लौड़े से निकली आखिरी बूंद तक उसके मुँह में निचोड़ दी.
वह मुझे ऐसे देख रही थी मानो जीवन में पहली बार किसी मर्द को देखा हो.
वह अपने मुँह में मेरे वीर्य को लेकर उससे खेलने लगी और जिस तरह वह मुझे देख रही थी … मुँह में वीर्य लेकर खेल रही थी, उससे मुझे बहुत मजा आ गया.
फिर उनसे ब्लू फिल्म में वीर्य खाने वाली एक्ट्रेस के जैसे आधा वीर्य गुटक लिया.
मैं निहाल हो गया और उसके बगल में लेट कर उसे अपनी बांहों में भर लिया.
अब हम फिर से किस करने लगे.
उसने मेरे लंड का आधा बचा हुआ वीर्य अपने मुँह से मेरे मुँह में डाल दिया.
अब वह अपनी जीभ मेरे मुँह में डालकर वीर्य के साथ खेलने लगी और बाद में उसने उसे भी गटक लिया.
मैं उसकी नर्म लेकिन ठोस चूचियों को मसलने लगा.
वह ‘हम्फ़ उह्ह्ह आह्ह’ की आवाज़ों के साथ मेरे होंठों को चूसने में लगी थी; साथ ही मेरे लंड को मुट्ठी में दबाकर हिलाने लगी.
ऐसा करते-करते मेरा लंड फिर से टाइट हो गया.
स्वाति ने कड़क लंड देखा तो उसकी आंखों में चमक आ गई.
वह नीचे आई और एक बार फिर से मेरे लंड के सुपाड़े को मुँह में लेकर चूसने-चुभलाने लगी.
उसकी इस अदा से मेरी तो रूह कांप गई.
मुझसे अब रहा नहीं गया, मैंने उसे पकड़ा और 69 के पोजीशन में ले आया.
अब मैं उसकी चूत चाटने में मग्न था और वह मेरे लौड़े की सेवा करने में लगी थी.
तभी मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी.
स्वाति उचक गई, लेकिन मैंने उंगली से उसकी गांड चोदना शुरू कर दिया.
उस समय उसकी चूत में मेरी जीभ चल रही थी और गांड में उंगली.
स्वाति पागलों की तरह मेरे लंड पर टूट पड़ी थी … देख कर ऐसा लग रहा था मानो वह लौड़े को उखाड़ कर खा ही जाएगी.
मेरे आंडों को तो ऐसे चूस रही थी मानो उसे दुनिया का सबसे प्यारा स्वाद मिल रहा हो.
करीब 10 मिनट की चुसाई के बाद उसकी चूत ने फिर से आग उगलना शुरू कर दिया.
मैंने उसे सीधा किया और अपने नीचे ले आया, फिर लौड़े पर ढेर सारा थूक लगाया और बिना कुछ बोले एक झटके में आधा लंड स्वाति की चूत में उतार दिया.
वह बेचारी इस हमले के लिए तैयार नहीं थी.
उसकी तो तेज़ चीख निकल गई और वह बेहोश हो गई.
मैंने सोचा होश में आएगी तो रोएगी-चीखेगी, इसलिए बिना देर किए एक और तेज़ झटका मारा जिससे मेरा लगभग पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ भीतर समा गया.
वह पूरी तरह से बे.होश हो गई थी.
मैंने हल्के से खुद ऊपर उठाया और देखा तो लंड पर हमारे पहले चुदाई का निशान लगा था … मतलब स्वाति की चूत फटने से निकला खू.न लगा था.
मैंने बिना देर किए एक और बार लगभग पूरा लौड़ा बाहर खींचा.
लंड बाहर खींचने के क्रम में स्वाति की टाइट कसी हुई चूत की कसावट के कारण ऐसा लगा जैसे वह भी हल्के से ऊपर उठ आई हो.
खैर … मैंने लंड का एक बार फिर से करारा शॉट अपनी प्यारी कुत्तिया की चूत में दिया.
इस शॉट के साथ ही स्वाति की चीख पूरे कमरे में गूँज गई.
उसने आंखें खोलीं, आंखों में आंसू थे … वह मुझे देख कर एक बार फिर से बेहोश हो गई.
मैंने पास में ही रखा हुआ ठंडे पानी की बोतल उठाई और पानी के छींटे स्वाति के चेहरे पर मारे.
पानी से उसे थोड़ी राहत हुई और वह जागने लगी.
उसने आंख खोली और मुझे ऐसे देखा जैसे मानो कह रही हो कि वह मरने वाली है.
वह दर्द के मारे बिलबिला रही थी.
उसकी छोटी सी बुर में मेरा लंड ऐसे फंसा था जैसे किसी कुत्ते का लंड कुतिया के बुर में अटका होता है.
वह लगातार सुबकती हुई रोए जा रही थी.
उसकी सिसकारियां और आहें सुनकर मैं पिघलने लगा था.
लेकिन इस माल की कुंवारी चूत इतने मेहनत से सील तोड़ने के बाद भला बिना चोदे कैसे छोड़ सकता था.
ये सोचकर मैंने लंड को धीरे से कमर हिलाते हुए बुर के भीतर के आखिरी कोने तक पेल दिया.
वह बस ‘उह’ ही कर पाई.
अब मैं उसके ऊपर लेट गया.
वह किसी लाश की भाँति लेटी हुई थी, कोई हलचल नहीं, बस आंसू और कराहने की मद्धिम आवाजें.
मैं उसके चेहरे को हाथों में पकड़े उसकी आंखों में देखते हुए उसे चूमता रहा … उसके आंसुओं को चाटकर पीता रहा.
ऐसा करीब 10 मिनट हुआ … चूत के भीतर मेरा लंड बिना पूरी चुदाई के ही ढीला होने लगा था.
इसलिए मैंने स्वाति से पूछा- बाबू, क्या कहती हो? आगे बढ़ूँ या रुक जाऊं?
स्वाति कुछ सेकंड सोचती हुई बोली- बेटू, क्या पूरा अन्दर हो गया है? या अभी और अन्दर जाएगा?
मैंने धीरे से जवाब दिया- नहीं बेबी, जितना होना था हो गया. अब दर्द भी जितना होना था हो चुका. अब बस हल्के-हल्के प्यार करूँगा. थोड़ा दर्द होगा पर दो-चार मिनट में वह भी खत्म हो जाएगा और फिर प्यार का सुखद अहसास ले पाओगी, जो हमारे प्यार को हमेशा के लिए हमारे भीतर अमर कर देगा.
स्वाति बोली- ऐसा है तो ठीक है, करो जैसे करना है. हां बस ध्यान रखो कि दर्द अब और ना हो और मेरी चूत ना फटे. मुझसे ये दर्द सहा नहीं जा रहा.
राजीनामा मिलते ही मैंने सबसे पहले अपनी जान के होंठों को अपने होंठों में लिया, चूची को हाथ से पकड़ा और होंठों को चूसते हुए धीमे-धीमे चूचियों को मसलने लगा.
अब स्वाति फिर से गर्म होने लगी, मेरा लंड भी कड़क होने लगा.
कुछ ही देर में स्वाति की आवाज़ बदल गई.
वह हांफने लगी, मस्ती में मचलने लगी.
मैंने होंठ छोड़कर चूची पीने पर ध्यान लगाया तो उसने अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूचियों में दबा लिया.
वह लगभग चीखती हुई बोली- आह्ह्ह उह्ह … काट लो इन्हें चूस-चूस कर पी जाओ इन्हें मेरे राजा … अब देर ना करो, पेल दो मुझे आह ओह मेरे सैयां, आज से मैं तुम्हारी बीवी बन गई अब जब चाहे मुझे चोद लिया करो!
ऐसे बड़बड़ाती हुई वह अपनी कमर को हिलाने लगी और लंड को हल्के-हल्के अपनी चूत में अन्दर-बाहर लेने लगी.
मैं समझ गया कि मेरी माल अब चुदने को तैयार है.
मैं भी अब कमर चलाने लगा, चूत में लंड को धीरे-धीरे पेलने लगा.
उसकी कसी हुई चूत में लंड बहुत मुश्किल से अन्दर जा पा रहा था.
मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई.
स्वाति लगभग उछलने लगी और मेरे कंधे पर दांत काट लिया.
उसकी मस्ती देख अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था.
मैंने स्पीड और बढ़ाई, वह भी नीचे से कमर उठाकर लंड लपकने लगी.
उसकी मादक आवाज़, जिसमें दर्द और मजा दोनों था, मुझे पागल करने लगी थी.
‘आह मेरे राजा मेरी बहन से पहले मेरी सुहागरात मना दी तुमने … आई लव यू अब मैं तुम्हारे बिना नहीं जी पाऊंगी … तुम जीवन भर मेरी चूत में लंड पेलते रहो, मैं तुम्हें कभी नहीं रोकूँगी आई लव यू राजा जी. आह पेल दो पूरा लौड़ा आह्ह्ह … उफ्फ़ हां और ज़ोर से … आह्ह्ह उह हाय कम ऑन येस बेबी!’ वह ऐसी मस्त आवाज़ें निकालने लगी थी.
थोड़ी देर चूत में ऐसे ही चोदने के साथ उसका दर्द लगभग खत्म हो गया था.
मैंने उसे डॉगी पोजीशन में किया और पीछे से चूत में लंड पर थूक लगाकर पेल दिया.
इस अचानक हुए आक्रमण के लिए वह तैयार नहीं थी.
वह थोड़ी सी लुढ़क सी गई और चीख भी पड़ी.
लेकिन जैसे ही मैंने लंड को चूत में आगे-पीछे अन्दर-बाहर करके पेलाई शुरू की, वह भी अपनी गांड को पीछे धकेल-धकेलकर चुदने का पूरा लुत्फ लेने लगी.
मैंने उसके बाल पकड़ कर उसे खींच कर रखा था और उसकी गांड पर चपत लगाते हुए धक्का पेल चुदाई करने लगा.
बीच-बीच में ऊपर से लंड पर थूक भी गिराता था ताकि चूत और चिकनी होकर सटा-सटा लंड निगलती रहे.
करीब 20 मिनट तक चले इस खेल में स्वाति निढाल हो गई.
उसकी चूत ने दो बार पानी छोड़ दिया था.
अब तो कमरे में बस ‘फच्च-फच्च, उह्ह्ह आह्ह् हायी हायी, ज़ोर से, धीमे से, उईई उह’ की आवाज़ें गूँज रही थीं.
करीब बीस मिनट बाद मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया.
मैंने तुरंत ही कंडोम उतारा लंड से और सारा माल स्वाति के पेट पर निकाल दिया.
फिर लंड स्वाति की पैंटी से साफ करके दुबारा से चूत में लंड डालकर एक दूसरे की बांहों में बाहें डाले हम दोनों चिपक कर लेट गए.
हमारी पहली चुदाई यादगार बन गई.
बिना ब्याह किए मुझे एक पत्नी और स्वाति को एक पति मिल गया.
आगे की कहानी फिर कभी!
तब तक के लिए आप सभी को दिल से धन्यवाद.
अगर आप मुझसे पहले की तरह संपर्क करना चाहते हैं तो आपको मेरी ईमेल आईडी पता ही है.
सभी को मेरे लंड के रस की आखिरी बूंद तक से प्यार.
उम्मीद है आप हसीनाओं के चूत में भूकंप ज़रूर आया होगा इसे पढ़कर और हवसियों के लंड में तो करेंट ज़रूर दौड़ा होगा.
वर्जिन चूत Xxx कहानी पर अपने विचार मुझे जरूर बताएं.
अब मैं आपसे विदा लेता हूँ.
आप सबका अपना अभि.
lalamalik1993@gmail.com