हॉट कॉल गर्ल फक स्टोरी में ऑफिस की थकान मिटाने के लिए मैंने एक कॉलगर्ल होटल के कमरे में बुलाई. उसे देखते ही मेरा लंड सलामी देने लगा. मस्त लड़की थी वो.
मेरा नाम विक्रम है, उम्र 29 साल। शादी अभी तक नहीं हुई, लेकिन मर्दानगी की भूख मेरे अंदर हमेशा सुलगती रहती है।
मैं मुंबई में रहता हूँ और एक IT कंपनी में जॉब करता हूँ।
दिन भर लैपटॉप के सामने कोडिंग, मीटिंग्स और बॉस की बकवास से दिमाग पक जाता है।
रात को अपने छोटे से 1 BHK फ्लैट में अकेला पड़ा रहता हूँ— चार दीवारें, एक टीवी और बेड।
ये अकेलापन कभी-कभी ऐसा जोश जगा देता है कि कुछ न कुछ करना ही पड़ता है।
पिछले हफ्ते की हॉट कॉल गर्ल फक स्टोरी है यह … शुक्रवार की शाम थी।
ऑफिस में दिन भर प्रोजेक्ट की डेडलाइन की मार पड़ी थी; बॉस ने सुबह से लेकर शाम तक चिल्ला-चिल्लाकर सिर खा लिया था।
8 बजे ऑफिस से निकला, बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी।
ऑटो पकड़ा, लेकिन घर जाने का मन नहीं था।
सोचा, आज कुछ अलग करना है, कुछ ऐसा जो सारी थकान और टेंशन को आग में जला दे।
मन में एक चाहत सी उठ रही थी— कुछ गरम, कुछ मस्त चाहिए था!
फोन निकाला और एक पुराने दोस्त को कॉल लगाई।
वो ऐसा शख्स है जो मुंबई की रातों को रंगीन करने का पूरा जुगाड़ रखता है।
मैंने कहा, “भाई, आज रात कुछ खास चाहिए! कोई मस्त माल भेज, जो रात को आग लगा दे। ऐसा कुछ जो सारी थकान निकाल दे!”
वो हँसा, उसकी हँसी में एक शरारत थी।
उसने कहा, “विक्रम, तू टेंशन मत ले। काजल को भेजता हूँ— 32 साल की है, लेकिन ऐसा माल कि लंड अपने आप सलामी देगा! तू जगह बता, होटल में मिलेगी।”
मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन जल्दी भेज!”
उसने पूछा, “कहाँ भेजूँ?”
मैंने सोचा, फ्लैट में बुलाना ठीक नहीं।
पड़ोसी शोर सुन लें या कोई दिक्कत हो जाए, तो मुसीबत होगी।
पिछले साल एक बार दोस्तों के साथ पार्टी की थी तो बिल्डिंग के सेक्रेटरी ने शिकायत कर दी थी।
इसलिए मैंने होटल में रूम बुक करने का फैसला किया।
बांद्रा में एक साफ़-सुथरा होटल है—न ज़्यादा भीड़, न सस्ता फील।
फोन से ऑनलाइन बुकिंग की—रूम नंबर 402, चौथी मंज़िल।
दोस्त को लोकेशन भेजी और कहा, “11 बजे तक भेज दे।”
वो बोला, “ठीक है, काजल को बोल देता हूँ। तू तैयार रहियो, मज़ा आएगा!”
ऑटो से 10 बजे होटल पहुँच गया।
रास्ते में सोच रहा था—काजल कैसी होगी? 32 साल की कॉल गर्ल, क्या सच में वैसी होगी जैसा दोस्त ने बताया?
मन में थोड़ा डर था, थोड़ा जोश। पहली बार ऐसा कुछ कर रहा था।
रिसेप्शन पर पहुँचा, एक पतला सा लड़का बैठा था, चश्मा लगाए, फोन में व्यस्त।
मैंने नाम बताया, उसने चाबी दी।
मैं लिफ्ट से ऊपर गया।
कमरा छोटा लेकिन मस्त था—एक डबल बेड, साफ़ सफ़ेद चादर और हल्की नीली लाइट्स, जो कमरे को थोड़ा रोमांटिक फील दे रही थीं।
खिड़की से समंदर की ठंडी हवा आ रही थी और बाहर समंदर की हल्की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
साइड में एक टेबल थी, उस पर पानी की बोतल और दो ग्लास रखे थे।
मैंने बैग पटका, जूते उतारे और बाथरूम में घुस गया।
शावर लिया।
गरम पानी मेरे बदन पर पड़ रहा था और माथे पर जमा सारा स्ट्रेस धीरे-धीरे बह रहा था।
नहाते वक़्त काजल के बारे में सोच रहा था—32 साल की, दोस्त ने कहा था कि माल कमाल का है! क्या वो सच में इतनी गरम होगी कि रात को आग लगा दे?
मेरा लंड शॉर्ट्स में थोड़ा सख्त होने लगा था.
लेकिन मैंने खुद को रोका।
सोचा, अभी तो पूरी रात बाकी है, जल्दबाज़ी क्यों करूँ?
शावर बंद किया, तौलिया लपेटकर बाहर आया।
आईने के सामने खड़ा हुआ।
मेरी बॉडी ठीक-ठाक है— 5 फीट 10 इंच का कद, चौड़े कंधे, हल्की चौड़ी छाती।
जिम नहीं जाता, लेकिन ऑफिस की भागदौड़ और वीकेंड पर दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने से फिट हूँ।
बाल थोड़े गीले थे, उन्हें हल्का सेट किया।
काले शॉर्ट्स और ग्रे टी-शर्ट पहनी— कुछ सादा, लेकिन कूल लुक।
जेब में ड्यूरेक्स कंडोम का पैकेट रख लिया— 3 पीस वाला, सेफ्टी पहले भाई! बेड पर लेट गया, मोबाइल निकाला और टाइम देखा—10:45। मन में हलचल थी।
पहली बार कॉल गर्ल बुला रहा था, थोड़ा डर था— कहीं कोई पंगा न हो जाए, पुलिस न आ जाए—लेकिन जोश उससे कहीं ज़्यादा था।
सोच रहा था, काजल कैसी होगी?
क्या वो सच में मेरी रात को जन्नत बना देगी?
11 बजे ठीक दरवाज़े पर नॉक हुई।
दिल की धड़कन अचानक तेज़ हो गई।
मैं उठा, शॉर्ट्स को ठीक किया और दरवाज़ा खोला।
सामने काजल खड़ी थी।
भाई, उसे देखते ही लंड में करंट सा दौड़ गया! 32 की उम्र में भी उसका बदन ऐसा कि 20 साल की लड़कियाँ फेल हो जाएँ।
काले टाइट टॉप में उसकी चूचियाँ उभरी हुई थीं, जैसे टॉप को फाड़कर बाहर आने को बेकरार हों।
नीचे लाल स्कर्ट इतनी छोटी कि उसकी गोरी, मोटी जाँघें पूरी नंगी दिख रही थीं।
बाल खुले थे, लंबे और काले, जो उसकी कमर तक लहरा रहे थे।
होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक चमक रही थी और आँखों में काजल— सचमुच उसका नाम उसके चेहरे पर लिखा था।
उसने मुझे देखा, एक शरारती स्माइल दी और बोली, “हाय, विक्रम? मैं काजल!”
उसकी आवाज़ में एक ऐसी गरमाहट थी, जो सीधे मेरे लंड तक गई।
मैं थोड़ा हक़लाया, “हाँ… हाँ, आ जा अंदर।”
वो अंदर आई, अपने कदमों से एक ठसक दिखाते हुए।
मैंने दरवाज़ा बंद किया, लॉक लगाया और उसने अपना छोटा सा बैग टेबल पर रख दिया।
मैं उसे ऊपर से नीचे तक देख रहा था।
उसकी चूचियाँ टॉप को फाड़ने को तैयार थीं और स्कर्ट के नीचे उसकी गोरी जाँघें चमक रही थीं।
वो मेरे पास आई, बेड पर बैठ गई और बोली, “क्या देख रहा है? पहली बार बुलाया है क्या?”
मैंने हल्का सा सिर हिलाया, “हाँ, पहली बार। लेकिन तू… तू तो कमाल है!”
वो हँसी, उसकी हँसी में एक शरारत थी, बोली, “अच्छा? तो आज तुझे ऐसा मज़ा दूँगी कि भूल न पाए!”
उसने अपने लाल हाई हील्स उतारे और मेरे करीब सरक आई।
उसकी खुशबू मेरे दिमाग में चढ़ रही थी— कोई महँगा परफ्यूम, जो होश उड़ा दे।
मैंने कहा, “काजल, तू सच में आग है!”
वो बोली, “अभी तो बस चिंगारी देखी है, आग तो अब लगेगी!”
उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी जाँघ पर रख दिया।
उसकी त्वचा इतनी नरम थी कि मेरा लंड शॉर्ट्स में तन गया।
मैंने उसकी जाँघ को सहलाया और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ हाथ बढ़ाया।
उसकी स्कर्ट के नीचे उसकी गर्माहट महसूस हो रही थी।
वो मुस्कुराई, “जल्दी है क्या?”
मैंने कहा, “जल्दी नहीं, लेकिन तुझे देखकर रुकना मुश्किल है!”
उसने मेरे गाल पर हाथ रखा, मेरे होंठों के करीब आई और बोली, “तो मत रुक!”
फिर उसने मुझे किस कर दिया— एक गहरी, गरम और गीली किस! उसके होंठ मेरे होंठों से चिपक गए, उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई।
मैंने भी पूरा जवाब दिया, उसकी जीभ को चूसा और हाथ उसकी कमर पर ले गया।
उसकी चूचियाँ मेरे सीने से दब रही थीं और मेरा लंड अब शॉर्ट्स में दर्द करने लगा था।
मैंने उसकी जीभ को ज़ोर से चूसा, उसका स्वाद मेरे मुँह में घुल रहा था।
वो मेरे बालों में उंगलियाँ फिरा रही थी और मैं उसकी कमर को कसकर पकड़ रहा था।
किस करते-करते उसकी साँसें तेज़ हो गईं और मेरी भी।
करीब 5 मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे।
फिर उसने किस तोड़ी, मेरी टी-शर्ट पकड़ी और एक झटके में उतार दी।
मेरा सीना देखकर बोली, “विक्रम, तू तो मस्त माल है!”
मैंने हँसते हुए कहा, “तू भी कम नहीं!”
उसने अपना टॉप उतारा—काला टाइट टॉप, जो उसकी चूचियों को कसकर पकड़े हुए था।
नीचे काली ब्रा में उसकी चूचियाँ क़ैद थीं।
मैंने ब्रा के ऊपर से उन्हें दबाया, वो सिसकारी भरी, “आह… ज़ोर से कर!”
मैंने ब्रा का हुक खोला और उसकी चूचियाँ आज़ाद हो गईं—गोल, भारी और निप्पल सख्त।
भाई, क्या नज़ारा था! उसकी चूचियाँ गोरी और मोटी थीं, निप्पल गहरे भूरे रंग के, जो सख्त होकर बाहर निकले हुए थे।
मैंने एक चूची मुँह में ली और ज़ोर-ज़ोर से चूसा।
उसकी निप्पल मेरी जीभ से रगड़ रही थी और मैं उसे हल्के से काटने लगा।
काजल की साँसें तेज़ हो गईं, “विक्रम, आह… चूस ले पूरा! और काट!”
मैंने दूसरी चूची को हाथ से दबाया, निप्पल को उंगलियों से मसला और बारी-बारी दोनों को चूसा।
उसका बदन गर्म हो रहा था, वो मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी।
मैंने उसकी एक चूची को मुँह में पूरा भर लिया, ज़ोर से चूसा और निप्पल को दाँतों से हल्के से काटा।
वो चीखी, “आह… विक्रम, मज़ा आ रहा है!”
मैंने 15 मिनट तक उसकी चूचियाँ चूसीं—कभी एक को, कभी दूसरी को।
उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
फिर उसने मेरे शॉर्ट्स में हाथ डाला, मेरा लंड पकड़ा और बोली, “ये तो तैयार है!”
मैंने कहा, “तेरे लिए तो हमेशा तैयार है!”
उसने शॉर्ट्स उतारा और मेरा 7 इंच का लंड बाहर आ गया— सख्त, गर्म और टनटना रहा था।
काजल ने उसे सहलाया, अपने नरम हाथों से ऊपर-नीचे किया, फिर उसने मुँह में लिया।
भाई, क्या चूस रही थी वो!
उसकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर गोल-गोल घूम रही थी और वो पूरा लंड अंदर तक ले रही थी।
उसका मुँह गीला और गरम था, मेरे लंड को पूरा भिगो रहा था।
मैं सिसकारी भर रहा था, “काजल, आह… तू कमाल है! और चूस!”
वो ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी—कभी टोपे को चाटती, कभी पूरा लंड गले तक लेती।
उसकी लिपस्टिक मेरे लंड पर लग रही थी और वो मुझे चूसते हुए आँखों में देख रही थी।
मैंने उसके बाल पकड़े और उसके मुँह को अपने लंड पर दबाया।
15 मिनट तक चूसने के बाद मेरा पानी निकलने को था लेकिन मैंने खुद को रोका।
उसे बेड पर लिटाया और उसकी स्कर्ट ऊपर की।
उसकी पैंटी दिखी— काली और गीली।
मैंने पैंटी को नीचे सरकाया और उसकी चूत नंगी हो गई।
भाई, क्या चूत थी! पाव रोटी की तरह फूली हुई, बिल्कुल क्लीन शेव्ड और पानी से तर-ब-तर।
उसकी चूत के होंठ मोटे और गुलाबी थे और उसमें से पानी टपक रहा था।
मेरा मुँह भर आया।
मैंने उसकी चूत पर मुँह लगाया—पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ से चाटा।
काजल चीखी, “विक्रम, आह… चूस ले!”
मैंने उसकी चूत को पूरा मुँह में लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसा।
उसका पानी मेरे मुँह में आ रहा था, नमकीन और गरम।
मैंने जीभ को नुकीला करके उसकी चूत के अंदर डाला और गोल-गोल घुमाया।
वो पागल हो गई, “विक्रम, और चूस… मत रुक!”
मैंने उसकी चूत के होंठों को फैलाया और जीभ को और गहरा डाला।
उसकी चूत की गर्मी मेरे चेहरे पर लग रही थी और मैं उसे पागलों की तरह चाट रहा था।
वो मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थी, उसकी टाँगें काँप रही थीं।
20 मिनट तक मैंने उसकी चूत चाटी, चूसी और जीभ से चोदा।
फिर वो ज़ोर से चीखी, “विक्रम, मैं झड़ रही हूँ!”
उसका पानी मेरे मुँह में बहने लगा और मैंने उसे पूरा चाट लिया।
अब असली खेल शुरू हुआ।
मैंने जेब से कंडोम निकाला।
काजल ने देखा और बोली, “विक्रम, सेफ खेलता है?”
मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, मज़ा पूरा, टेंशन ज़ीरो!”
मैंने पैकेट खोला, कंडोम अपने सख्त लंड पर चढ़ाया।
रबर की परत मेरे लंड पर कस गई लेकिन जोश कम नहीं हुआ।
मैंने काजल की टाँगें फैलाईं, अपना कंडोम वाला लंड उसकी चूत पर रखा।
उसकी चूत गीली और तैयार थी।
मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा और पूरा लंड अंदर घुस गया।
काजल चीखी, “आह… विक्रम, फाड़ दे!”
मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए।
उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं और उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
कंडोम की वजह से थोड़ा अलग फील था लेकिन उसकी चूत की टाइटनेस मेरे लंड को पूरा मज़ा दे रही थी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे और ज़ोर से चोदा।
उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
मैंने कहा, “काजल, तेरी चूत तो जन्नत है!”
वो बोली, “विक्रम, और चोद… पूरा अंदर डाल!”
मैंने स्पीड बढ़ाई, हर धक्के में उसकी चूत की गहराई तक जा रहा था।
कंडोम की वजह से मैं बेफिक्र था, पूरा जोश लगा रहा था।
25 मिनट तक मैंने उसे चोदा—कभी उसकी चूचियाँ दबाता, कभी उसके होंठ चूसता।
उसकी सिसकारियाँ तेज़ होती गईं, “विक्रम, आह… और ज़ोर से!”
मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और गहरे धक्के मारे।
उसकी चूत कंडोम के साथ भी गीली और गरम थी, हर धक्के में मुझे जन्नत का एहसास दे रही थी।
फिर मेरा पानी निकलने को हुआ, मैंने कहा, “काजल, मैं झड़ने वाला हूँ!”
वो बोली, “झड़ जा, मेरे ऊपर!”
एक ज़ोरदार धक्के के साथ मैं झड़ गया, कंडोम मेरे गरम माल से भर गया।
काजल भी उसी वक़्त झड़ गई, उसकी सिसकारियाँ थम गईं।
हम दोनों बेड पर पड़े रहे, साँसें तेज़ थीं।
मैंने कंडोम उतारा, उसे टिश्यू में लपेटकर डस्टबिन में फेंका।
काजल मेरे सीने पर सर रखकर बोली, “विक्रम, तूने तो आग लगा दी!”
मैंने कहा, “काजल, तू भी कम नहीं!”
लेकिन रात अभी बाकी थी।
थोड़ी देर बाद मैंने दूसरा कंडोम निकाला, उसे पहना और काजल को फिर से बेड पर लिटाया।
इस बार मैंने उसे घोड़ी बनाया।
उसकी मोटी गांड मेरे सामने थी; मैंने उसकी कमर पकड़ी और पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला।
वो चीखी, “विक्रम, आह… और ज़ोर से!”
मैंने पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे, उसकी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी।
उसकी चूत मेरे लंड को पूरा निचोड़ रही थी।
7 मिनट तक मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदा, फिर उसकी चूचियाँ पकड़कर उसे और ज़ोर से ठोका।
वो चीख रही थी, “विक्रम, फाड़ दे मेरी चूत!”
फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया, कंडोम अभी भी मेरे लंड पर था।
उसने मेरे लंड को अपनी चूत में लिया और ऊपर-नीचे होने लगी।
उसकी चूचियाँ मेरे मुँह के सामने उछल रही थीं; मैंने उन्हें चूसा, काटा और दबाया।
वो मेरे लंड पर कूद रही थी, “विक्रम, आह… मज़ा आ रहा है!”
10 मिनट तक वो मेरे लंड पर कूदी और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए।
कंडोम फिर से मेरे माल से भर गया।
रात भर हमने ऐसे ही मस्ती की।
मैंने हॉट कॉल गर्ल फक में हर बार कंडोम यूज़ किया— कभी उसे बेड के किनारे पर चोदा, कभी दीवार से सटाकर ठोका।
सुबह 4 बजे तक हम थक गए।
काजल बोली, “विक्रम, तूने रात को जन्नत बना दिया!”
मैंने कहा, “काजल, तू भी कमाल की चुदक्कड़ लड़की है!”
फिर वो उठी, मेरे लंड को फिर से सहलाने लगी और मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
उसने मेरे लंड को 10 मिनट तक चूसा और मेरा सारा माल अपने मुँह में ले लिया।
फिर सुबह 5 बजे मुझे एक किस देकर वो चली गई।
उस रात के बारे में मैं जब भी सोचता हूँ तो मेरा लंड मेरे पैंट में खड़ा हो जाता है।
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