Meri Premika Aur Meri Adhuri Mohabbat
ट्रू लव स्टोरी में मुझे एक लड़की से सच्चा प्यार था लेकिन हमारे बीच सेक्स जैसी बात कोई नहीं थी. एक बार उसे शौपिंग करनी थी तो वो मेरे साथ गयी. वापिसी में क्या हुआ?
दोस्तो कैसे हो? मैं अभि, एक बार फिर से आप लोगों के पास अपनी एक नई कहानी लेकर आया हूँ।
मेरी पिछली कहानी
भाभी ने दिया मुझे बर्थडे गिफ्ट
की सराहना के लिए आप सभी का धन्यवाद!
जितने भी लोगों ने मुझे मेल किए हैं, मुझे गूगल चैट पर मैसेज किया है, सबको दिल से धन्यवाद!
दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आप सबको मेरी कहानी पढ़ कर आपके लंड से वीर्य की धार छुटी ही होगी और हसीनाओं की चूत से चूत का मधुर शहद टपका होगा।
दोस्तो, यह ट्रू लव स्टोरी है मेरी और मेरी पूर्व प्रेमिका स्वाति की, जो कि सातवीं क्लास से मेरे साथ ही पढ़ती थी।
इंटर पास करने के बाद हम दोनों ने एक-दूसरे से अपने प्यार का इज़हार किया था।
हमारा रिलेशनशिप करीब 8 साल रहा।
हम दोनों एक-दूसरे के लिए पूरी तरह समर्पित थे लेकिन कुछ ऐसे संयोग बने कि हम दोनों को अलग होना पड़ा।
मैं आज भी उसे याद करता हूँ और वह भी मुझे याद करती है।
कभी-कभी भूले-बिसरे वह मुझे मैसेज भी कर देती है, मैं भी उसे मैसेज कर देता हूँ, पर अब वह बात नहीं रही।
हम दोनों एक नहीं हो सकते, इस बात को हमने मान लिया है। खैर, बहुत ज्यादा कुछ बताने की जरूरत नहीं है, हम सीधे अपनी कहानी पर आते हैं।
स्वाति कोई हूर-परी तो नहीं है, ना ही कोई ऐसी शारीरिक बनावट की उसे देखकर लोग आहें भरें… लेकिन मैं उसे प्यार करता था, तो मेरे लिए वह इस दुनिया की सबसे हसीन लड़की थी।
स्वाति की हाइट 5 फुट 4 इंच ही थी, लेकिन उसका फेस एकदम बच्चों की तरह छोटा सा, क्यूट सा था।
गालों पर उसके डिंपल पड़ते थे।
पतली सी कमर, उभरी हुई गांड और ठोस गोलाकार 32 की चूंची! लड़कों की तरह हेयर स्टाइल रखती थी।
मैं जितना सांवला था, वह उतनी ही ज्यादा गोरी थी।
उसके बदन से एक अजीब सी खुशबू आती थी—पता नहीं वह कोई इत्र लगाती थी या यह उसके पसीने की मादक गंध थी.
हम दोनों एक-दूसरे को बहुत ही ज्यादा प्यार करते थे और बिना कहे एक-दूसरे की बातें समझ लेते थे।
उसकी सारी चीज़ें मैं डिसाइड करता था और मेरी सारी चीज़ें वह डिसाइड करती थी।
हमारे 8 साल की रिलेशनशिप में हम सिर्फ 5 या 6 बार ही एक-दूसरे के करीब आए थे, वरना मैं उसे उंगलियों से छूने में भी डरता था कि कहीं मेरे सांवलेपन से उसके गोरे बदन पर कोई दाग न लग जाए।
बात तब की है जब उसकी बड़ी बहन की शादी होने वाली थी।
रोज की तरह उसने मुझे कॉल किया और बताया कि दीदी की शादी फिक्स हो गई है और दो-तीन महीने में ही शादी होने वाली है।
उसने बोला, “शॉपिंग करनी है मुझे तुम्हारे साथ, तुम मेरे लिए ड्रेस सेलेक्ट करना।”
फिर मैं उसे लेकर शहर के मॉल में गया।
वहां उसने कपड़े खरीदे, फिर हमने खाना खाया।
शाम हो रही थी और करीब 6:00 बजने वाले थे।
हम गांव से हैं, तो देर शाम तक लड़कियां घर से बाहर रहें, यह अच्छा नहीं समझा जाता।
सर्दियों के दिन थे इसलिए अंधेरा भी जल्दी होने लगता है।
उसकी मम्मी का कॉल भी आया कि, “कहाँ रह गई? अभी तक आई क्यों नहीं?”
खैर, हम घर चलने को हुए।
वह मेरे पीछे बैठी थी।
उसने अपने पिट्ठू बैग में जो भी कपड़ों की खरीदारी की थी, वह रख ली थी।
बाइक चलाते हुए सर्दी ज्यादा लग रही थी, वह मुझसे चिपक के बैठी थी।
यह पहली दफा था जब वह मेरे इतने करीब थी।
उसकी गरम-गरम सांसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं।
उसने अपने हाथों से मेरी कमर पकड़ रखी थी।
मैं बाइक धीरे ही चला रहा था, फिर भी ठंड ज्यादा लग रही थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ और खींच लिया।
अब उसकी चूची मेरी पीठ से चिपक गई थी!
स्वाति को पहली बार अपने इतने करीब महसूस करके मेरे लंड में हलचल शुरू होने लगी।
मैं जानबूझकर ब्रेक लगाने लगा, जिससे उसकी चूची मेरी पीठ पर बार-बार दबने लगी।
उसने भी कुछ नहीं बोला।
मैं एक हाथ से बाइक कंट्रोल किए हुए था और दूसरे हाथ से स्वाति के नर्म हाथों को सहला रहा था।
फिर मैंने उसका हाथ अपनी जांघ पर रख लिया, उसने कुछ नहीं बोला.
थोड़ी देर बाइक चलाने और उसकी चूची को अपनी पीठ पर रगड़ने के बाद मेरा मन और बहकने लगा, तो मैंने अपना हाथ पीछे करके सीधे स्वाति की जांघ पर रख दिया.
उसने धीरे से मेरे कान में बोला, “ये क्या कर रहे हो! सीधे बाइक चलाओ, ठंड लग रही है और तुम मजाक कर रहे हो! एक हाथ से बाइक चलाकर गिर जाएंगे दोनों!”
मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी जांघ को सहलाता रहा।
अब 7 बजने को थे, एकदम अंधेरा हो चुका था और हम अब गांव में पहुंचने वाले थे।
मुझे उसको गांव से पहले ही उतार देना था और किसी ऑटो पर बिठा देना था ताकि कोई देखे नहीं.
मैंने एक झाड़ी के पास बाइक रोक दी।
हम दोनों बाइक से नीचे आए।
मैंने उसे बिना कुछ बोले कमर से पकड़कर उठाया और बाइक पर बिठा दिया, वो मुस्कुराने लगी… स्वाति बोली, “अब वेट करना पड़ेगा किसी टेम्पो का!”
और वो अपना बैग उतारने लगी.
मैंने बिना कुछ बोले अपना हेलमेट उतारा और स्वाति को गले से लगा लिया।
उसने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
हमने पहली बार एक-दूसरे को गले लगाया था, सेक्स की तो बात ही बहुत दूर थी।
मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी पीठ पर फिसलने लगे.
वो भी मेरी पीठ और कमर को सहला रही थी।
मैं, “बाबू, अब भी ठंड लग रही क्या?”
मैं धीरे से उसके कान में फुसफुसाया.
स्वाति, “नहीं, जान!”
उसके ‘जान’ बोलने में एक मीठी आह सी लगी.
मैंने बिना देर किए उसके गले पर अपनी जीभ फिरा दी।
उसको तो जैसे करंट लगा हो!
वो एकदम से चिहुंक गई और पूरे दम लगाकर मुझे बाहों में कस लिया और ‘हम्फ-हम्फ’ करके गर्म सांसें छोड़ने लगी।
मैंने फिर उसके होंठों पर अपनी जीभ फिरा दी।
उसने मुझे देखा, आंखें लाल सी हो रही थीं उसकी।
फिर उसने आंखें बंद कर लीं और मुझे एक मौन सहमति दे दी किस (kiss) करने की।
मैंने उसके होंठों को हल्के-हल्के चूसना और चूमना शुरू किया, वो भी मेरा साथ देने लगी।
वो पूरी तरह कांप रही थी लेकिन हम दोनों के शरीर से गर्म आंच सी निकल रही थी।
3-4 मिनट की होंठ चुसाई ही हुई थी कि मुझे दूर से किसी टेम्पो की लाइट दिखाई दी।
मैंने उसे खुद से अलग किया और ‘आई लव यू’ बोलकर उसे बताया कि टेम्पो आ रही है, खुद को ठीक कर लो और अपने पापा को मैसेज कर दो चौक पर आने को।
फिर मैंने उसे टेम्पो में बिठाया, वो चली गई.
टेम्पो के पीछे मैं भी बाइक से घर आ गया।
किसिंग के बाद जो भी बोला था, केवल मैंने ही बोला था… वो बिना कुछ बोले चली गई थी।
उसी रात करीब 11 बजे स्वाति ने रोज की तरह मुझे कॉल किया।
हाय-हेलो के बाद मैंने उसे अचानक किए किस के लिए सॉरी बोला लेकिन उसने कुछ जवाब नहीं दिया।
मैं उससे सच्चा प्यार करता था इसलिए मुझे डर लग रहा था कि वो कहीं नाराज़ न हो जाए.
फिर थोड़ी देर बात करने के बाद उसने कॉल कट कर दी!
अब वो मुझसे थोड़ी अजनबी सा बिहेव कर रही थी।
जो लड़की रात-दिन मेरे पीछे पड़ी रहती थी, अब वो जैसे बस फॉर्मेलिटी के लिए बात कर रही थी, या यूं कहूं तो शायद बहुत ज्यादा शर्मा रही थी।
ऐसे ही करीब 10 दिन बीत गए।
उसकी इस हरकत से मैं अब चिढ़ने लगा था।
उस रात उसने कॉल किया तो मैंने बिना किसी औपचारिकता के सीधे झल्लाकर पूछा, “क्या है? क्या नाटक लगा रखा है? क्यों ढंग से बात नहीं कर रही हो? और नहीं करनी बात तो कॉल क्यों कर रही हो?”
स्वाति, “सॉरी…”
सुबकते हुए.
मैं, “यार, रोने क्यों लगी? तुम जैसे कर रही हो आजकल, मुझे गुस्सा आ गया, सॉरी!”
फिर हम दोनों कुछ देर यूं ही एक-दूसरे को सॉरी बोलकर बात करते रहे।
वो थोड़ी देर सुबकती रही.
फिर मैं बोला, “एक किस कर लिया तो ये हाल है! बाकी लड़कों की तरह कुछ और कर लेता— बिना पूछे, जबरदस्ती या इमोशनल ब्लैकमेल करके— तो तुम तो मुझे छोड़कर चली ही जाती या मुझे मार ही डालती!”
स्वाति, “कुछ और क्या कर लेते? जो मन में था, कर तो लिए ना! और मैंने रोका भी तो नहीं तुम्हें, ना उसके लिए कुछ बुरा-भला बोला!”
मैं, “तुम्हें पसंद नहीं आया मेरा तुम्हारे इतने पास आना?”
स्वाति, “ऐसा नहीं है, बस मुझे लगा नहीं था कि ऐसा कुछ, ऐसे इतनी जल्दबाजी में हो जाएगा!”
मैं, “तुम कहो तो अगली बार एकदम आराम से करें क्या?”
स्वाति, “धत्त! बहुत मस्ती चढ़ रही है, थप्पड़ लगाऊंगी!”
मैं, “बेबी सुनो न, एक किस दो ना अभी!”
स्वाति, “भक्क, मुझे शर्म आती है!”
मैं, “प्लीज दो ना…”
स्वाति, “ओके, लेकिन पहले तुम दो, फिर मैं!”
मैं, “ओके, तो मेरे पास आओ!”
स्वाति, “हम्म…”
मैं, “एकदम पास, इतने पास की हमारे बीच से हवा भी ना गुजर पाए! मुझे अपने सीने से लगा लो और अपनी गोरी मुलायम बाहों में भर लो!”
स्वाति लड़खड़ाती हुई आवाज में, “हूँ…न…”
मैं, “अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख…”
स्वाति, “हम्म…”
मैं, “और अब मैं तुम्हारे होंठों को अपने होंठों में दबाकर उन्हें हल्के-हल्के चूस रहा हूँ। हल्के हाथों से तुम्हारी कमर और पीठ को सहलाते हुए तुम्हारे गले को सहला रहा हूँ… मुआह!”
स्वाति, “बेबी, बस अब और नहीं, वरना कुछ हो जाएगा!”
मैं, “बेटू, मैं तुम्हारे गले को चाट रहा हूँ और फिर तुम्हारी कान को अपने मुंह में भरके चूस रहा हूँ!”
स्वाति ‘हम्फ-हम्फ’ कर हांफने लगी थी।
मैं, “तुम्हें मुंह में अपना जीभ डालकर तुम्हारी जीभ को सहला रहा हूँ और तुम मेरी जीभ को चूस रही हो!”
स्वाति, “उफ्फ! ये क्या बोल रहे हो जान! मैं मर ना जाऊं कहीं, प्लीज बस करो!”
मैं, “आई लव यू बाबू, प्लीज मत रोको मुझे… पहली बार तो तुम मेरी बाहों में हो, आज मुझे मेरे दिल की हसरतें पूरी कर लेने दो! बाबू, मैंने तुम्हें बेड पर लेटा दिया है और खुद तुम्हारे ऊपर लेट गया हूँ। अब मैं तुम्हारे पेट पर किस कर रहा हूँ और तुम्हारी नाभि में जीभ डालकर उसे चाट रहा हूँ… मुआह, मुआह, मुआह!”
स्वाति, “हाय… मेरे राजा! प्लीज जो करना है करो, पर ऐसे तड़पाओ नहीं!”
मैं, “तुम्हारी टीशर्ट ऊपर करके तुम्हारे दोनों बूब्स पर किस कर रहा हूँ… मुआह!”
स्वाति, “नहीं, नहीं, नहीं, अब बस! अब कुछ नहीं, प्लीज छोड़ दो!”
मैं, “ठीक है छोड़ दूंगा, बस थोड़ा सा प्यार और करने दो!”
स्वाति, “ओके…”
मैं, “अब मैं तुम्हारे गोल-गोल दोनों दूध को पकड़कर उन्हें मसलते हुए बारी-बारी से पीने लगा हूँ.”
स्वाति, “बाबू… प्लीज ये क्या कर रहे हो! मैं अब पागल हो जाऊंगी!”
मैं उसे दूध पीने का बोल-बोलकर स्मूच किस की आवाज में किस किए जा रहा था।
वो तड़प रही थी; उसकी उलझती सांसें और लड़खड़ाती आवाज उसके हालात बयान कर रहे थे।
मैं, “बाबू, अगर तुम कहो तो मैं आज तुम्हारे अन्दर आ जाऊं?”
स्वाति, “मतलब?”
मैं, “बाबू, मुझे सेक्स करना है अभी के अभी!”
स्वाति, “नहीं प्लीज, ये नहीं कर पाऊंगी मैं! बाकी जो कर रहे हो करते रहो, अच्छा लग रहा मुझे!”
मैं, “वो करने दो, और अच्छा लगेगा!”
स्वाति, “प्लीज बात मत करो! वो छोड़कर जो करना है करो!”
मैं, “ठीक है, अपना हाथ दो मुझे और मेरी पैंट के अंदर करो इसे। फिर मेरा छोटू पकड़ लो!”
स्वाति, “ये क्या होता है?”
मैं, “मेरा लंड पकड़ लो और अपने नर्म हाथों से सहलाओ!”
स्वाति, “छी, कैसी बातें बोल रहे हो!”
मैं, “सेक्स नहीं करनी तो ना करेंगे, पर बाकी सब तो कर सकता हूँ ना?”
स्वाति, “हां!”
मैं, “तो पकड़ो लंड और सहलाओ इसे, और मैं तुम्हारा दूध पियूँगा!”
स्वाति, “उफ्फ बदमाश! धीरे करो, काट क्यों रहे हो!”
मैं, “मेरी जान, एक जादू देखोगी?”
स्वाति, “हां!”
मैं, “कमर उठाओ!”
स्वाति, “हां, उठा ली!”
मैं, “अब मैंने तुम्हारी पैंटी और पजामा एक साथ नीचे खींचकर उतार दिया है, और तुम्हारी छोटी सी गोरी-गोरी चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर दबा लिया!”
स्वाति चिंहुक उठी!
मैं, “तुम्हारी छोटी सी प्यारी रसीली चूत को मैं उंगली से सहला रहा हूँ। मेरी उंगली तुम्हारे चूत के रस से भीग गई है… अब मैं चूत-रस में भीगी अपनी उंगली को चाटकर तुम्हारी मलाई को खा रहा हूँ! बेबी, तुम्हारी टांगें फैलाकर मैं अब नीचे तुम्हारी चूत के पास आ गया हूँ। अब मैं धीरे-धीरे तुम्हारी जांघों पर चाट रहा हूँ.”
स्वाति, “उफ्फ अभि! अब बस भी करो, ऐसा लग रहा मैं सूसू (पेशाब) कर दूंगी! बस करो ना!”
मैंने बिना उसकी बात का ध्यान दिए अपना काम चालू रखा।
अब मैं उसकी चूत पर, छोटे-छोटे झांटों पर चाटने लगा।
स्वाति मस्ती में ‘आह’, ‘उफ्फ’, ‘शशश’ जैसी आवाजें निकालने लगी।
फिर मैंने एकदम से उसकी चूत में किस कर लिया और अपनी जीभ से चूत के छेद को कुरेदने लगा।
स्वाति, “उफ्फ मेरी जान! ये क्या कर दिया, मैं हवा में उड़ रही हूँ! प्लीज ऐसी बातें ना करो!”
मैं, “तुम्हारी चूचियों को जोर से मसलते हुए इस मखमली रसदार चूत को चाट रहा हूँ, और इस चूत से निकलने वाली मलाई को चाट-चाटकर खा रहा हूँ! आई लव यू मेरी चूत की रानी!”
स्वाति, “जानू… प्लीज करते रहो, मुझे कुछ हो रहा है… उफ्फ, उफ्फ, उफ्फ!”
करीब 2 मिनट की चूत चुसाई में स्वाति ने अपने लाइफ का पहला माल अपनी चूत से टपका दिया और “अब बस, अब बस” कहने लगी, जबकि मैं बार-बार चूत चाटने का बोलकर उसे किस करता रहा।
वो तेज़-तेज़ हांफने लगी… करीब 7 मिनट बाद वो शांत हुई।
मैं, “बाबू, अच्छा लगा?”
स्वाति, “धत्त! ये कौन पूछता है!”
मैं, “कौन से क्या करना, तुम बताओ अच्छा लगा या नहीं?”
स्वाति, “हां, लगा!”
मैं, “तो अब मुझे भी अच्छा लगे, ऐसा कुछ करो!”
स्वाति, “क्या करूं? मुझे नहीं आता कुछ!”
मैं, “मुंह खोलो!”
स्वाति, “हं?”
मैं, “मैं तुम्हारे दोनों ओर पैर करके सीने पर बैठा हूँ और अपना लंड तुम्हारे होंठों पर रगड़ रहा हूँ। अब तुम मुंह खोलो और लंड अपने मुंह में लेकर इसे लॉलीपॉप बनाकर चूसो!”
स्वाति, “हूँ… मुआह… मुआह.”
ऐसे वो करीब 5 मिनट करती रही।
मैं उसकी चूची और चूत की तारीफ करते हुए उसे उकसाता था।
करीब 5 मिनट बाद मेरे लंड को मुट्ठी मारते-मारते माल निकलने को हुआ।
मैं, “बाबू, मेरा माल निकलने वाला है, इसे पीना है तुमको! इसलिए लंड को और तेज चूसो और निचोड़ लो मुंह में!”
वो और तेज किस करने लगी, फिर मैंने भी एक मीठी आह के साथ अपना लंड खाली कर दिया… आज पहली बार हम दोनों ने फोन सेक्स किया था।
स्वाति शरमा रही थी, पर मैं समझ गया था कि उसे मज़ा आया है.
अब ये हमारा रोज का काम हो गया।
हम फोन सेक्स में अलग-अलग तरीके से एक-दूसरे का माल निकालने लगे लेकिन कभी बुर में लंड डालने की बात नहीं होती थी।
मेरी ट्रू लव स्टोरी कैसी लग रही है आपको?
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