मेरी गांड का उद्घाटन मेरे यार ने किया

Views: 5 Category: Gay Sex Stories By chudakkadraani Published: June 06, 2026

Xxx गांडू की कहानी में एक मेरे दोस्त ने मुझे गांडू बनाया. हम दोनों साथ साथ हगते तो मेरे मल को निकलते हुए देख वह मजाक में कहता- यार, तेरा छेद बड़ा हो गया, तू इसमें मेरा लंड ले सकता है.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सागर है और उम्र 27 साल है.
मैं गुजरात का रहने वाला हूँ. मैं दिखने में एक साधारण सा लड़का हूँ.

ये मेरी लाइफ का पहली Xxx गांडू की कहानी है.

मेरा दोस्त नीलेश मुझसे 5 साल बड़ा है.
हम दोनों एक साथ पढ़ते थे और साथ ही खेलते थे. हम दोनों के घर बगल बगल में हैं और हम दोनों कभी भी कहीं भी सो जाते थे, हमारे घर वालों को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं थी.

एक छोटे से गांव में हम दोनों रहते थे और भौतिक सुख सुविधाओं का काफी अभाव था.
हमारे घरों में संडास नहीं थे, हमें बाहर खुले में शौच के लिए जाना पड़ता था.

जब हम दोनों की स्कूल में पढ़ने की उम्र थी, तब रोज रात को साथ मैं लेटरिन करने बाहर खुले में जाते थे.

दोस्तो, मैं आपको बताऊं कि मेरा मल बहुत ही ज्यादा मोटा आता है, जिसको निकालने में मेरी गांड चिरने सी लगती है.

चूंकि नीलेश और मैं साथ में हगने जाते थे तो वह मेरे मल को निकलते हुए देखता था.

वह मजाक मस्ती में कह देता था- यार, तेरा छेद बड़ा हो गया है. अब तू इसमें मेरा लंड भी ले सकता है.
वह ये सब मजाक में कहता था तो मैं उसकी बात को गंभीरता से नहीं लेता था.

फिर कुछ ऐसा हुआ कि वह कभी कभी मेरे लौड़े को सहला देता था तो कभी मैं उसके लंड को हिला देता था.
उसका लंड मेरे लंड से दोगुना बड़ा था और काफी मोटा भी था.

उसके लंड को पहली बार छूने से मुझे काफी सनसनी हुई थी और शायद उसी दिन से मेरे अन्दर एक लड़की ने जन्म ले लिया था.
वह भी मेरे साथ अपनी मस्ती बढ़ाने लगा था.

एक दिन उसने कहा कि ला मैं तेरी गांड पानी से धो देता हूँ.
न जाने क्यों मुझे अन्दर से काफी अच्छा लगा कि ये मेरी गांड को धोएगा.
सच में उस दिन उसने मेरी हगी गांड को धोया तो मुझे काफी सुकून मिला.

उस दिन के बाद से हम दोनों एक दूसरे की गांड को धोने लगे थे और एक दूसरे की गांड को धोते समय उसमें उंगली भी कर लेते थे, या लंड हिला देते थे.
इस तरह की मस्तियां अब रोजाना ही होने लगी थीं.

नीलेश को मेरी गांड बहुत पसंद थी.
हम दोनों कई बार उसके घर के किसी सूने कमरे में पूरे नंगे होकर एक दूसरे का लंड हिला लेते थे, किस करते थे, बूब्स चूस लेते थे.

हमारे बीच धीरे धीरे से ये सब थोड़ा ज्यादा होने लगा और नीलेश तो अब मेरी गांड को चाटने भी लगा था.
मैं उसे रोकता, तब भी वह नहीं रुकता.
ये सब अन्दर ही अन्दर मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

ऐसे ही एक दिन उसने मुझे बुलाया और बोला- सागर, मैं तेरी गांड में अपना लंड डालना चाहता हूँ.

मैं तो एकदम से डर गया और सीधा उसे मना कर दिया.
उसने बहुत रिक्वेस्ट की लेकिन मैंने उसका लंड देखा था.
उसका लंड मेरी गांड को गड्डा बना सकता था.

एक बार पहले भी जब उसने अपनी सिर्फ दो उंगलियां मेरी गांड में डाली थीं, तब भी मुझे बहुत दर्द हुआ था.
इसलिए मैंने मना कर दिया और मैं घर आ गया.

घर आने के बाद मैं पूरा दिन उसी के बारे मैं सोचता रहा.

पता नहीं क्यों … लेकिन मुझे भी अब उसका लंड रोज हिलाने की आदत हो गई थी.
तब भी मैं डर रहा था.

इस बात के दूसरे दिन उसने फिर से मुझे बुलाया.

आज मुझे भी कुछ हो गया था जो मैं अपना मन बना कर उसके पास बेहिचक चला गया.

मेरे जाते ही उसने मुझे हग कर लिया और मुझे बोलने लगा- मुझे तुझसे प्यार हो गया है. मैं तो तेरी गांड का गुलाम बनकर जीना चाहता हूँ.
वैसे भी मुझे आदत हो गई थी. वह मेरी गांड दबाता था, मुझे पूरा नंगा कर देता था.

आज शायद मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी तो मैंने उसकी बात को सुनकर उससे कुछ नहीं कहा.
इसे उसने मेरी हां मान ली.

फिर उसने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे ऊपर लेट गया.
कुछ मिनट तक उसने मेरे होंठ चूसे फिर मेरे बूब्स चूसने लगा.
वह बहुत जोर जोर से मेरे चूचे दबा रहा था.

धीरे धीरे वह नीचे आ गया और उसने मुझे उल्टा लेटा दिया.
पता नहीं क्यों लेकिन आज मुझे भी कुछ अच्छा लग रहा था.

उसने मुझे उल्टा यानि 69 में करके अपना पूरा मुँह मेरी गांड के अन्दर डाल दिया और अपनी जीभ मेरी गांड के छेद में घुसा दी.

क्या बताऊं दोस्तो, मुझे अजीब भी लग रहा था.
आज पहली बार किसी ने मेरी गांड चाटी थी और इससे मुझे मजा भी खूब आ रहा था.

वह अपनी पूरी जीभ डाल कर मेरी गांड के छेद को चौड़ा कर रहा था और मैं इस सबसे बहुत मजे ले रहा था.

कुछ मिनट तक यूं ही मेरी गांड चाटने के बाद उसने मुझसे रिक्वेस्ट की- तुम भी मेरा लंड चूसो.

मुझे भी कुछ हो गया था तो मैं उसे मना नहीं कर पाया.
हालांकि मुझे अजीब भी लग रहा था लेकिन न जाने क्यों … मैं उसे मना नहीं कर पाया.

उसने मुझे घुटने के बल बिठा दिया और मेरे सामने अपना लंड हिलाने लगा.
मैंने उसके लंड को पकड़ कर सहलाया और उसका टोपा अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

पहले तो मुझे बहुत अजीब लग रहा था लेकिन बाद मैं मुझे भी बहुत मजा आने लगा.

मुझे खुद पता नहीं चला कि कब मैंने उसका पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया था.

ऐसे ही कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद उसने अपना पूरा पानी मेरे मम्मों पर गिरा दिया और मुझसे थैंक्यू बोलने लगा.

उसे यह पता नहीं था कि अब तो सागर उसके लिए एक बहुत कुछ सोचने लगा है.

मैंने उससे कहा- आज रात को साथ में हगने जाएंगे.
उसने कहा- ठीक है.

मैं घर आ गया और पूरा दिन बस नीलेश के बारे मैं सोचने लगा.
उसने मेरी गांड चाटी थी और मैं आह आह करने लगा था.
वह सब मुझे याद आने लगा.

मैं अपनी गांड पर हाथ फेरने लगा और सोचने लगा कि अब कब फिर से नीलेश इसे चाटेगा.

मेरा इंतजार खत्म हुआ और रात को हम दोनों गए.
इस बार नीलेश ने मुझसे कहा कि आज रात को वह मेरी गांड में लंड डालना चाहता है.

मैं एकदम चुप था क्योंकि मन तो मेरा भी बहुत था लेकिन उसका लंड मेरी गांड को फाड़ देगा … बस ये डर लग रहा था.

फिर मैंने उसका लंड हिलाया और हम दोनों घर आ गए.

हमारे बीच ये तय हो गया था कि रात को वह मेरे पास आएगा और अपने घर के बाजू में बने एक खाली मकान में मेरे साथ मस्ती करेगा.

उस मकान में जानवर बंधते थे पर आजकल कोई भी जानवर नहीं था.

रात को एक बजे उसने मुझे उठाया और उसके बाजू के घर में ले गया.

इस बार उसने मुझे नीचे बिठा कर अपना लंड सीधा मेरे मुँह में घुसा दिया.
मैं भी अच्छे से उसे चूसने लगा.

उसने मेरा सर भी पकड़ लिया और अपना पूरा लंड मेरे मुँह में डाल कर मेरे मुँह को चोदने लगा.

मेरे मुँह से घों घों की आवाज आ रही थी, मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी.

उसने ऐसे ही कुछ देर तक मेरे मुँह की चुदाई की और मुझे घोड़ी बना दिया.

उसने मेरे पीछे आकर अपना मुँह मेरी गांड के छेद में डाल दिया और गांड में उंगली भी करने लगा.

क्या बताऊं दोस्तो, मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया था.

अब तो मैं भी उसके हुक्म का गुलाम बन गया था.
वह तबियत से मेरी गांड के छेद को ढीला कर रहा था.

उसकी जीभ में जैसे कोई जादू था.
ऐसे ही दस मिनट तक उसने मेरी गांड के अन्दर तक जीभ डालकर उसे चाटा.

फिर वह मुझे किस करने लगा.
अब उसने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरे सब कपड़े, जो कि पहले से आधे निकल चुके थे, उन्हें पूरे निकाल दिए और मुझे नंगा कर दिया.

वह मेरी गांड में लंड डालना चाहता था.
लेकिन मैंने उससे कहा- यदि मुझे दर्द हुआ तो मैं नहीं करने दूंगा.

उसने हां बोल कर अपने साथ लाई हुई तेल की बोतल को खोला और मेरी गांड को तेल से भर दिया.
तब उसने अपने लंड पर भी बहुत सारा तेल लगा दिया.

अब उसने मेरे दोनों पैर अपने कंधों पर रखवा दिए और लंड मेरी गांड के छेद पर सैट कर दिया.
उसने एक धक्का लगाया लेकिन ज्यादा तेल की वजह से लंड फिसल गया.

तो उसने फिर से लौड़े को छेद पर सैट किया और इस बार थोड़ा धीरे से धक्का लगाया.
उसने लंड का टोपा मेरी गांड के अन्दर पेल दिया.

मेरे मुँह से एक चीख निकल गई और मैं दर्द के मारे रोने लगा.

वह वहीं रुक गया.

थोड़ी देर बाद उसने फिर से एकदम धीरे से धक्का लगाया लेकिन इस बार आधा लंड मेरी गांड में था, तो बस ऐसा लगा कि किसी ने सरिया अन्दर सरका दिया हो.

इस बार उसने मेरे मुँह पर अपने मुँह को लगा कर मुझे किस कर लिया और मेरे मुँह को बंद कर दिया जिससे आवाज बाहर तक ना जाए.

मुझे ऐसे लग रहा था, जैसे किसी ने मेरी गांड में गर्म लोहा डाल दिया है.

थोड़ी देर बाद जब मैं थोड़ा रिलेक्स हुआ तो उसने धक्के लगाने चालू कर दिया.
उसका आधा लंड मेरी गांड में चल रहा था.

मैं Xxx गांडू बन कर उसके लौड़े के मजे ले रहा था.
ऐसे ही धक्कों में कब उसका पूरा लंड मेरी गांड में चला गया, मुझे पता भी नहीं चला.

अब मुझे भी मजा आने लगा था तो मैं उसे अपने ऊपर खींच कर चूमने लगा.
वह भी मुझे अपनी लुगाई समझ कर चोदने लगा.

कुछ देर बाद उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरे पीछे आकर अपना लंड सैट कर दिया.

मैंने गांड हिला कर इशारा दिया तो उसने जोर लगा दिया.
इस बार उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया.

थोड़ा सा दर्द हुआ लेकिन अब तो मुझे मजा आने लगा था.

उसने आधे घंटे तक मेरी गांड को पेला और फाड़ दिया.
फिर उसने मेरी गांड में ही अपना सारा पानी निकाल दिया.

कुछ मिनट तक वही चुम्मा चाटी करने के बाद जब हम खड़े हुए तो मुझे चलने में भी दिक्कत हो रही थी.

लेकिन वह पूरी प्लानिंग के साथ आया था, उसने मुझे पेनकिलर दी और सहारा देकर मुझे घर तक ले गया.

उसके बाद से 1 दिन छोड़ कर वह मेरी गांड बेरहमी के साथ मारता था।

हमने 1 दिन का गैप इसलिये रखा ताकि कोई क्रीम-लोशन वगैरा अपनी गांड पे लगा कर गांड ठीक कर लूं।

वैसे एक चीज का फायदा और हुआ मुझे- वह यह की अब टट्टी खुल कर आती थी मुझे और अब वह सख्त टट्टी से गांड फटने का डर भी नहीं था।

‘एक पंथ दो काज’ वाली कहावत सही हो गयी।

उसके कुछ बाद उसने मुझे सीधा प्रपोज कर दिया, बोला- मैं तुम्हें अपनी रानी बनाना चाहता हूं और पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं.

मैंने दो दिन सोचने के बाद उसे हां कर दिया क्योंकि अब तो मैं उसको अपना सब कुछ मान चुकी हूँ.

तो दोस्तो, ये थी मेरी सील पैक गांड की Xxx गांडू की कहानी
अगली बार आपको मैं अपनी और नीलेश की सुहागरात की कहानी सुनाऊंगी.
तब तक के लिए विदा.
chudakkadraani@gmail.com

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