गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून- 7


हॉर्नी लेडी फक स्टोरी में मैं अपनी सहेली के एक रिश्तेदार से सेट हो गयी और उनके साथ सेक्स का मजा लेने गोवा आ गयी. मजा लें मेरी चुदाई का.

दोस्तो, मैं आपकी अंजलि शर्मा.

कहानी के पिछले भाग
सिनेमा हॉल में न्यूड सेक्स
में अब तक आपने जाना था कि किस तरह से सुमेश जी ने पीवीआर के सिनेमा हॉल में मुझे अपनी गोदी में बिठा कर उछाल उछाल कर चोद दिया था.

अब आगे हॉर्नी लेडी फक स्टोरी:

चुदाई के बाद 10 मिनट तक मैंने ऐसे ही सुमेश जी के ऊपर बैठी रह कर आराम किया.

अब तक फिल्म को चलते हुए 40 मिनट से ज्यादा हो चुके थे.

सुमेश जी बोले- अंजलि, फिल्म का इंटरवल होने वाला है. चलो अब हम अपने कपड़े सही कर लेते हैं वर्ना दिक्कत हो जाएगी हम दोनों को. जब इंटरवल खत्म हो जाएगा उसके बाद तुम्हारी चुत की एक राउंड चुदाई और होगी.
मैंने भी उनकी बात से सहमत होते हुए कहा- ठीक है सुमेश जी, कर लेना अपनी बीवी की चुदाई!

मैं सुमेश जी के ऊपर से उतर गई और साइड वाली सीट पर आकर बैठ गई.
मैंने अपनी स्कर्ट को ठीक किया और अपनी ब्रा को ऊपर कर लिया.

अपने दोनों बूब्स को अपनी ब्रा के अन्दर सैट किया और शर्ट के सारे बटन लगा लिए.
इसी के साथ मैंने अपने बालों को भी सही किया.

सुमेश जी ने भी अपनी शर्ट के बटन लगा लिए.

अब हम दोनों को देख कर कोई बोल नहीं सकता था कि अभी 5 मिनट पहले ही मेरी चुदाई हुई है.
हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर बैठे हुए थे और आराम कर रहे थे.

थोड़ी देर बाद इंटरवल हो गया और थिएटर की सारी लाइट्स जल गईं.

सुमेश बोले- अंजलि चलो बाहर चल कर कुछ खा लेते हैं, थोड़ी एनर्जी आ जाएगी.
मैंने ओके कहा और हम दोनों थिएटर से बाहर आ गए.

बाथरूम में जाकर मैंने खुद को सही किया और फ्रेश हुई.

कुछ देर बाद कुछ नाश्ता करके हम लोग कोल्डड्रिंक पीने लगे थे.
तभी इंटरवल खत्म होने को था. लोग अन्दर जाने लगे थे.

हम दोनों भी थिएटर के अन्दर आ गए.

फिल्म फिर से शुरू हो चुकी थी और लाइट्स भी पूरी तरह से बंद कर दी गई थीं.
हम दोनों फिर से अपनी सीट के पास आ गए.

मैं फिर से सुमेश जी से चुदने के लिए तैयार थी.

सुमेश जी ने पूछा- अंजलि, मजा आया पहले राउंड में?
मैंने कहा- हां सुमेश जी बहुत मजा आया!

सुमेश जी बोले- अंजलि इस राउंड में और ज्यादा मजा आने वाला है तुमको.
मैंने उन्हें सवालिया नजरों से देखा कि ऐसा क्या करने वाले हो आप?

तो वे कहने लगे कि इस राउंड में मैं तुम्हारी बहुत जोरदार चुदाई करने वाला हूं.
मैंने कहा- मैं तो खुद तैयार हूँ सुमेश जी आपसे चुदने के लिए, ले लो आप बीवी की चुत … जैसा चोदना है चोद लो! मैं तो चाहती हूँ मेरे पति मुझे अच्छे से चोदे.

मेरी बात सुन कर सुमेश जी को फिर से जोश आ गया और उन्होंने मुझे अपनी गोद में फिर से बैठा लिया.
सुमेश जी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे और हम दोनों की किस फिर से शुरू हो गई.

इस बार सुमेश जी ने बिना देरी किए मेरे होंठों को चूमना चालू किया और मेरी शर्ट के सारे बटन खोल दिए.

इस बार उन्होंने शर्ट को मेरे बदन से नीचे उतार दिया यानि अलग ही कर दिया.
अब मैं ऊपर से सिर्फ ब्रा में ही रह गई थी.

हम दोनों पूरी बेशर्मी से एक दूसरे को किस कर रहे थे और एक दूसरे की चुदास को और ज्यादा बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे थे.

मैंने भी सुमेश जी की शर्ट के बटन खोल कर शर्ट को पीछे की और कर दिया.

हम दोनों की किस लगभग 5 मिनट तक चली और सुमेश जी ने मुझे उनके लंड को फिर से चूसने के लिए कहा.
मैं पहले से ही सुमेश जी का लंड चूसने के लिए राजी थी, तो उनके घुटनों के पास आ गई.

मैंने सुमेश जी की जींस को फिर से खोल दिया और उनका अंडरवियर भी उनकी जांघों से नीचे खींच कर उतार दिया.
सुमेश जी का लंड पहले की तरह फिर से तन चुका था और मेरी चुदाई करने के लिए फिर से पूरी तरह से तैयार था.

मैंने लंड के टोपे को उसकी खाल से बाहर निकाला और मुँह लेकर चूसने लगी.
सुमेश जी भी लंड चुसाई का पूरा मजा ले रहे थे.

मैंने भी अपनी पूरी कोशिश के साथ सुमेश जी का लंड चूसा और मजे लेती रही.
सुमेश जी का लंड पूरी तरह से चिकना हो चुका था और मेरी चुत की चुदाई करने के लिए कड़क हो गया था.

इधर मेरी चूत भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और चुदने के लिए फिर से तैयार थी.
सुमेश जी ने मुझे उठा लिया और मेरी स्कर्ट का बटन खोल दिया.

मैं समझ गई कि इस बार सुमेश जी मेरी स्कर्ट भी उतारना चाहते हैं.
पर मैंने उन्हें रोकना चाहा कि सुमेश जी नंगी मत कीजिए मुझे!

पर सुमेश जी मेरी कहां सुनने वाले थे.
उन्होंने मेरी बात बिना सुने ही मेरी स्कर्ट के बटन को खोल कर उसे मेरी चिकनी जांघों खींचा और नीचे उतार दिया.

उन्होंने मुझे पूरी तरह से नंगी कर दिया था. मैं हॉल में इधर उधर देखने लगी कि कोई देख तो नहीं रहा है.

हॉल में घुप्प अंधेरा था … केवल स्क्रीन की लाइट से कुछ कुछ दिखाई से रहा था.
तभी सुमेश जी मुझे एक झटके से उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया.

सुमेश जी ने मेरी कमर पर हाथ रख कर मुझे उठाया और अपने लंड को मेरी चूत के छेद के नीचे बिल्कुल अच्छे से सैट कर दिया.
मैं अभी सही से सैट भी नहीं हो पाई थी कि सुमेश जी ने एकदम से धक्का मारा और उनका सख्त लंड मेरी चूत के छेद के अन्दर फिसलता हुआ घुस गया.

मैं मीठी सी आह भरती हुई सुमेश जी के मूसल लौड़े पर धँसती चली गई.
सुमेश जी का पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर मेरी बच्चेदानी तक समा चुका था.

बच्चेदानी पर जब जब लौड़े की चोट लगती है तो मेरी मीठी हूक सी निकल जाती है.

तभी सुमेश जी ने पीछे हाथ डाले और उन्होंने मेरी ब्रा के हुक को भी खोल दिया.
मेरी ब्रा ढीली हुई तो उन्होंने उसको भी मेरे बूब्स के ऊपर से उतार दिया और मेरे सारे कपड़े साइड में कुर्सी पर रख दिए.

मैं मादरजात नंगी हो कर उनके लौड़े पर झूला झूलने के लिए रेडी हो गई थी.

मेरे जिस्म के ऊपर इस वक्त कपड़े की एक धजी भी नहीं थी.
मैं एक पराए मर्द के लंड के ऊपर नंगी बैठ हुई थी और वह भी थिएटर के अन्दर खुले आम!

सुमेश जी ने मेरी कमर पर हाथ रखा और मुझे फिर से अपने लंड पर उछालना शुरू कर दिया.
वे मुझे धकापेल चोदने लगे.

मैं भी आहें भरती हुई सुमेश जी के लौड़े से चुदने का मजा ले रही थी.
उस समय मैं जोरदार तरीके से सुमेश जी के लंड पर उछल रही थी, तो मेरे दोनों दूध भी उनके सामने मस्त हिल रहे थे.

मुझे इस वक्त अपनी इज्जत का बिल्कुल भी डर नहीं था कि कोई अगर मुझे थिएटर में इस तरह नंगी देख लेगा तो क्या होगा मेरा!
मैं चुदाई के मद में इतनी ज्यादा मदहोश हो चुकी थी कि बस मुझे सिर्फ और सिर्फ सुमेश जी और उनका लंड ही दिखाई दे रहा था.

मैंने अपनी बेशर्मी की सारी हदें पार कर रखी थीं … बस चुदाई के मजे लेने में लग गई थी.
सुमेश जी भी मेरे ऊपर टूट पड़े थे और वे नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर बस मेरी चूत का भर्ता बनाते हुए आनन्द ले रहे थे.

ये कहना गलत नहीं होगा कि एक ऐसे हसीन और गर्म औरत उनके हाथ लग चुकी थी, जो खुद भी चुदाई के लिए बहुत ज्यादा प्यासी थी.
सुमेश जी मेरी इसी बात का फायदा उठा कर मुझे गोवा लेकर आए थे. इधर वे मेरी चूत और मेरे यौवन का मजा ले रहे थे.

मैं भी सुमेश जी से चुदवा कर बहुत खुश हो रही थी.
हम दोनों को चुदाई का मजा लेते हुए लगभग अभी तक 15 मिनट हो चुके थे.

सुमेश भी मेरे दूध चूसते हुए अपने लंड की सवारी करवा रहे थे.
कुछ देर और चुदने के बाद मैं झड़ने के लिए तैयार हो गई थी.

मैंने उन्हें कहा भी कि मेरी चुत अब जाने वाली है लेकिन वे मदहोश थे और मुझे चोदे जा रहे थे.
कुछ ही देर तक चुदने के बाद मैं झड़ने झड़ने लगी.

मैं सुमेश जी के लंड को अपनी चुत के रस से फिर से गीला कर चुकी थी.

वे अरबी घोड़े की मानिंद अपनी ऐड़ लगाए जा रहे थे.
वे अभी तक किंचित मात्र भी नहीं थके थे, सच में वे किसी सांड की तरह मेरी चुत की लगातार चुदाई करते जा रहे थे.

मेरी सांसें बहुत जोर से फूल रही थीं और अब चुत में भी जलन होने लगी थी.

सुमेश जी ने मुझे लगभग दो मिनट और अपने लंड के ऊपर उछाला और उसके बाद उन्होंने मुझे अपनी गोद से नीचे उतार दिया.
उन्होंने मुझे साइड वाली चेयर के ऊपर बैठा दिया और वे अपनी जींस में से अपनी बेल्ट निकलने लगे.

मैं कुछ समझ नहीं पाई कि सुमेश जी ऐसा क्यों कर रहे हैं.
उसके पहले ही सुमेश जी ने अपनी बेल्ट निकाल कर मेरे गले में डाल दी और बेल्ट का हुक लगा दिया.

मैं अवाक थी कि अब कौन सा जादू होने वाला है.
तभी सुमेश जी ने कहा- अंजलि चलो जल्दी से चेयर पर चढ़ कर घुटनों के बल घोड़ी बन जाओ.
मैंने कहा- ऐसे में दिक्कत होगी मुझे!

पर उन्होंने मेरी एक ना सुनी और मुझे कुर्सी के ऊपर चढ़ा दिया.
उन्होंने मुझे घुटनों के बल ही चेयर के ऊपर कर दिया और जो बेल्ट सुमेश जी ने मेरे गले में डाली थी उसका पट्टा अपने हाथ में ऐसे ले लिया मानो सच में उन्होंने मुझे अपनी कुतिया ही बना लिया हो.

सुमेश जी ने उस पट्टे को जोर से अपनी ओर को खींचा जिस की वजह से मेरे गला थोड़ा सा खिंच सा गया.
उसी पल सुमेश जी ने मुझे घोड़ी बना कर अपना लंड मेरी चुत के अन्दर पेल दिया.

मैं मस्ती से कराह उठी और मुझे समझ में आ गया कि वे क्या चाहते हैं.
सुमेश जी का समूचा लंड मेरी चुत के अन्दर चला गया था.

मैं सिनेमा हॉल की कुर्सी पर सुमेश जी की कुतिया बनी हुई थी.
अब सुमेश जी ने मुझे फिर से चोदना शुरू कर दिया.

उनका लंड मेरी चुत के अन्दर बहुत तेज गति से चल रहा था जिसकी वजह से मेरी चूत की रगड़ाई बहुत अच्छी तरह से हो रही थी.
मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

यह कहना गलत नहीं होगा कि उस पोजीशन में मुझे चुदाई का मीठा मीठा दर्द हो रहा था.
मेरी गर्दन सीट के ऊपर लगी हुई थी और गांड हवा में हिल रही थी.

पीछे से सुमेश जी अपना लंड पेल कर मुझे चोदे जा रहे थे.
करीब दस मिनट तक उन्होंने मुझे घोड़ी बना कर मेरी चूत को चोदा और उसके बाद उनकी गति में एकदम से बहुत ही ज्यादा तेजी आ गई.

वे जोश में आ चुके थे. उस वक्त उन्होंने अपना एक पैर मेरी गर्दन के ऊपर ऐसे रख दिया था कि क्या ही बताऊं.
उनके इस तरह से पैर रखने की वजह से मेरी जान ही निकल गई थी.

पीछे से सुमेश जी का लंड मेरी चूत के अन्दर काफी गहराई तक घुस कर जोरदार धक्के मार रहा था.
ऊपर से सुमेश जी ने मेरी गर्दन के ऊपर अपना भारी पैर रख रखा था और साथ ही वे बेल्ट के पट्टे को पकड़ कर खींच रहे थे.

मेरी हालत दो कौड़ी की रंडी के जैसी हो गई थी.
सुमेश जी ने तो सच में मुझे अपनी कुतिया ही समझ लिया था.

अब लंड के झटके इतनी तेज गति से लगने शुरू हो गए थे कि मेरी चूत में बहुत तेज दर्द होने लगा था.
मैं बहुत थक चुकी थी मगर सुमेश जी लगातार मुझे चोदे जा रहे थे.

मैं दर्द भरी आवाजें निकाल रही थी- आआह आह आह सुमेश जी, प्लीज आराम से करो. आह सुमेश जी!

अब मेरी हालत रोने वाली हो गई थी और मेरी आंखों से आंसू आने लगे थे.
पर सुमेश जी किसी नीग्रो या जंगली सांड की तरह से मुझे बेरहमी से चोदे जा रहे थे.

वे अपने एक हाथ से मेरी चिकनी गोरी मोटी गांड पर जोर जोर से थप्पड़ भी मार रहे थे.
मेरी गांड लाल हो गई थी और उसमें से एक अलग ही गर्मी निकल रही थी.

उनके लोहे जैसे सख्त लौड़े ने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था.
मुझे लगने लगा था कि इस बार सुमेश जी ने शायद कोई दवा खा ली थी.

लगभग और 15 मिनट तक उन्होंने मुझे अपनी कुतिया बना कर रखा और ऐसे ही चोदते रहे.

कुछ देर बाद सुमेश जी का बदन अकड़ने लग गया और मैं समझ गई कि अब सुमेश जी झड़ने वाले हैं.
तभी सुमेश जी ऊँह उनहह करते हुए मेरी चूत के अन्दर झड़ गए.

उन्होंने फिर एक बार मेरी चूत को अपने लंड के अमृत से भर दिया था.
सच में दोस्तो, मेरी हालत सच में छह कुत्तों से चुदी हुई सड़कछाप कुतिया के जैसी हो गई थी.

सुमेश जी ने मेरी गर्दन के ऊपर से पैर हटाया और मुझे कुर्सी के ऊपर से नीचे उतार दिया.

सुमेश जी हांफते हुए बोले- अंजलि, मजा आया चुद कर?
मैंने थकान भरी स्थिति में भी उन्हें एक अच्छी सी मुस्कान देते हुए कहा- हां पति जी, बहुत मजा आया.

सुमेश जी बोले- चलो अंजलि, तैयार हो जाओ, शो खत्म होने वाला है.
मैंने जल्दी से अपनी ब्रा को उठाकर पहना और सुमेश जी ने पीछे से मेरी ब्रा का हुक लगा दिया.

उसके बाद मैंने अपनी शर्ट और स्कर्ट भी पहनी और अपने बालों को सैट किया.
पर्स से लिपस्टिक निकाल कर उसे अपने होंठों पर लगाई क्योंकि सुमेश जी मेरे होंठों की लिपस्टिक पूरी चाट चुके थे.

मैंने अपना हुलिया ठीक किया क्योंकि मेरे मेकअप की हालत बिगड़ चुकी थी.

सुमेश जी ने भी अपने कपड़े ठीक किए और हम दोनों मूवी खत्म होने से पहले ही वहां से निकल आए.
मैंने बाथरूम में जाकर खुद को सही से देखा और मेकअप को कुछ और ठीक किया.

बाहर आई तो सुमेश जी बोले- अंजलि, चलो लंच कर लेते हैं.
हम दोनों लंच करने के लिए एक रेस्टोरेंट में आ गए.

सुमेश जी बोले- अंजलि तुम बैठो, मैं तुम्हारे शॉपिंग के बैग्स लेकर आता हूँ.
मैंने सुमेश जी से कहा- आप लंच ऑर्डर कर दीजिए, जब तक मैं खुद शॉपिंग के बैग्स लेकर आ जाती हूँ … क्योंकि मुझे पैंटी भी पहननी है.

उस बात पर सुमेश जी बोले- ठीक है, चलो तुम ही ले आओ.
मैं वहां से फिर उसी शॉप पर पहुंच गई, जहां से हमने ब्रा और पैंटी ली थी.

सेल्समेन ने मुझे देखकर स्माइल दी, तो मैंने भी उसे देखकर स्माइल दी.
मैंने उससे कहा- भइया, मेरे बैग्स दे दीजिए.

उसने मुझे मेरे बैग्स दे दिए.
उसके बाद उसने एक कार्ड देते हुए कहा- मैम यह मेरी शॉप का कार्ड है, आप रख लीजिए. अगर किसी चीज की जरूरत हो तो आप मुझे कॉल कर सकती हैं.

मैंने भी उसकी बात को समझते हुए उसका विजिटिंग कार्ड अपने बैग में रख लिया.
फिर मैंने अपने बैग में मेरी पिंक वाली पैंटी चेक की, जो मैं सुबह पहन कर आई थी, तो वह उसमें नहीं थी.

मैंने उससे कहा- भईया, वह पैंटी इसमें नहीं है जो मैंने आपको दी थी?
उसने मुझे वह पैंटी देते हुए कहा- मैम, वह मैंने आपके … नई ब्रा पैंटी के साथ नहीं रखी थी क्योंकि वह यूज की हुई पैंटी थी न!

यह सुनकर मुझे बहुत शर्म आई.
वह समझ गया था कि मैं सुबह वही पैंटी पहन कर आई हूँ और अभी बिना पैंटी के ही नंगी घूम रही हूँ.

मैंने उससे कहा- भैया, मैं आपका चेंजिंग रूम इस्तेमाल कर सकती हूँ क्या?
तो उसने कहा- हां जी मैम, इस्तेमाल कर लीजिए.
मैं अपनी पैंटी लेकर चेंजिंग रूम में आ गई और जब मैंने वह पैंटी पहनना चाही, तो महसूस किया कि वह पैंटी थोड़ी सी गीली हो रही है और चिपचिपी भी हो रही है.

जबकि मुझे अच्छे से ध्यान था कि जब मैंने उस सेल्समेन को मेरी पैंटी दी थी, तब मेरी चूत एकदम सूखी हुई थी. उस वजह से मेरी पैंटी गीली नहीं हो सकती थी. अगर गीली होती भी तो मैंने 2.5 घंटे की फिल्म पूरी देख ली थी .. अब तक तो पैंटी सूख जाती.

मुझे उस पर शक हुआ. जब मैंने उस पैंटी को थोड़ा ध्यान से देखा और सूंघा … तो मुझे पता चला कि उस कुत्ते ने मेरी पैंटी पर अपना स्पर्म निकाल दिया था, जिसकी वजह से वह हल्की सी चिपचिपी हो रही थी.

उसने स्पर्म को पैंटी से साफ करने की कोशिश भी की थी, जिसे मैं देख पा रही थी, पर उसने उसे अच्छे से साफ नहीं किया था. मैं समझ गई थी कि इस सेल्समेन के इरादे मेरे बारे में ठीक नहीं हैं.

जब मैं शॉप में आई थी तब से ही उसकी नजर मेरे बूब्स पर थी, वह मेरे बूब्स को घूर रहा था.
यह चीज़ मैंने पहले ही नोटिस कर ली थी.

दरअसल इसमें गलती उसकी भी नहीं है, अगर उसके सामने कोई खूबसूरत औरत इस तरह खड़ी होगी, अपने बूब्स दिखाती हुई, तो किसी का भी लंड भी खड़ा हो जाएगा.

खैर … अब मुझे समझ आ गया था कि इसी लिए उसने अपना नंबर मुझे दिया था.

फिर मैं उस पिंक पैंटी को पहने बिना ही चेंजिंग रूम से बाहर आ गई.

मेरी पैंटी मेरे हाथ में ही थी और वह भी समझ गया था कि अभी भी मैंने पैंटी नहीं पहनी है.

मैंने अपने सारे बैग्स लिए और उसे एक स्माइल के साथ धन्यवाद बोलकर उस शॉप से निकल गई.

मैं सुमेश जी के पास आ गई.
सुमेश जी ने भी लंच ऑर्डर कर दिया था और कुछ देर बाद लंच आ गया.

हम दोनों ने लंच किया और उसके बाद सीधे हम दोनों शाम 5 बजे तक रिजॉर्ट आ गए.

कल रात को पूल वाली चुदाई की वजह से और आज की भरपूर चुदाइयों के कारण मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी.
मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी थोड़ा आराम कर लेते हैं, मैं बहुत थक चुकी हूँ.

सुमेश जी बोले- हां, अंजलि चलो अब हम दोनों आराम कर लेते हैं.
हमने अपने सारे कपड़े उतारे और मैं सुमेश जी के साथ नंगी ही ब्लैंकेट में आ गई और हम दोनों सो गए.

इस तरह सुमेश जी ने लगभग एक हफ्ते तक मेरी चूत की अच्छी से चुदाई की.

मैंने भी अपने नए पति को खुश किया और किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ी.
मैंने अपने इस हनीमून में अपनी शर्म उतर कर फेंक दी थी, जो अपने आज मेरी इस कहानी में पढ़ा है.

उसके बाद मैं अपने पति रोहण के पास दुबई चली गई. मेरे पाठकों को पता है कि रोहण मेरे बेटे हैं जो अब मेरे पति बन कर मुझे चोद कर मजा देते हैं.

दोस्तो, आपको मेरी यह हॉर्नी लेडी फक स्टोरी कैसी लगी?
मैं आपके लंड को खड़ा करने में कितनी सफल रही, इस बात का जवाब आप मुझे जरूर दीजिएगा.

आप चाहें तो आप मेरी पुरानी सारी दास्तान भी पढ़ सकते हैं, जिसके लिंक मैंने नीचे शेयर किए हैं.
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मेरी मेल आईडी है
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fir mai utho aur sabse boli mai aap logo se pehle chudwakar aap logo ki mardangi taste karungi fir aap logo ki job pakk…

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