बॉटम गे बॉय कहानी में मेरे चाचा के बेटे ने मुझसे मुठ मरवा कर मेरे गे सेक्स की शुरुआत कर दी. वो तो पढने बाहर चला गया, पर मुझे लंड की जरूरत लगने लगी.
मेरा नाम शरद है, मैं एक गोरा और स्लिम बॉडी का बंदा हूँ.
मेरी उम्र 28 साल है, मैं रायपुर के पास एक गांव में रहता हूँ.
मुझे लड़कों में गहरी रुचि है और मैं अपने सगे मामा के बेटे से प्यार करता हूँ.
मैं जब 11वीं में पढ़ता था, उस समय मेरे एक दूर के चाचा के लड़के ने जो मुझसे तीन साल बड़ा था, अपने लौड़े की मुठ मरवाई थी.
उसके बाद वह अक्सर मुझसे मुठ मरवाया करता था.
यहीं से बॉटम गे बॉय कहानी शरू हो गयी थी.
उसके साथ रहते रहते मुझे लड़कों में रुचि पैदा हो गई और लड़कों को पसंद करने लगा था.
मैं उससे उम्र में छोटा था इसलिए उसी के अनुसार जो कहता, वह मैं करता था.
बाद में जब मुझे इसकी लत पड़ गई, तब मैं अपने आप को एक बॉटम के तौर पर देखने लगा.
फिर मेरा वह चचेरा भाई इंजीनियरिंग करने बॉम्बे चला गया और मैं अकेला महसूस करने लगा.
मेरी इच्छाएं बढ़ने लगी.
अब मैं भी 21 साल का हो गया था और रायपुर के कॉलेज में पढ़ने लगा.
चूंकि में बीए कर रहा था तो अक्सर गांव में ही रहता था.
वहां मेरे पिता जी की कपड़े की दूकान थी, जिसमें मैं भी बैठता था.
मेरा ननिहाल हमारे गांव में ही है, मेरे मामा यहीं गांव में ही रहते हैं.
उनके दो बेटे हैं.
उनके बड़े बेटे का नाम रोशन है जो मुझसे उम्र में आठ साल बड़े हैं.
भैया बहुत ही सुंदर गोरे और गठीले मर्दाना शरीर के थे.
मुझे उनसे प्यार हो गया; मैं ही मन उन्हें चाहने लगा.
चूंकि हम लोग एक ही गांव में रहते थे, तो रोज आना जाना लगा रहता था.
मामा का घर हमारे घर से लगभग 2 किलोमीटर दूर था.
उनके घर आने जाने से मैं उन्हें कई बार नहाते हुए देखता था, तो मेरे अन्दर की प्यास बढ़ जाती थी.
किन्तु वे मेरे बड़े भाई थे इसलिए कुछ बोल भी नहीं पाता था.
पर हमारे बीच अच्छे संबंध थे.
उनकी बॉडी बहुत मनमोहक और सुंदर थी.
उनकी गोरी छाती में काले बालों के मध्य उनके गुलाबी निप्पल कैसे मस्त लगते थे … आह क्या ही बताऊं!
तने हुए कंधे, भरे हुए गाल, गठीली जांघें … आह सच कहूं तो उनमें वह सब कुछ था जो एक स्ट्रेट बॉय में होना चाहिए.
मैं हमेशा खाली समय उनके बारे में सोचता रहता और प्लान करता कि कैसे पटाऊं.
मैं उनके नाम की मुठ मारने लगा.
वे भी अक्सर हमारे घर आया करते थे.
उनकी शादी नहीं हुई थी.
उनकी दोस्ती मेरे दूर के मामा के साथ थी, चूंकि वे दोनों बराबर की उम्र के थे तो अक्सर वे दोनों साथ में ही रहते थे.
मैं मौके की तलाश में रहता था कि कब भैया के साथ सेक्स करूं.
उनके लौड़े से जी भर के गांड मरवाने की सोचता रहता, उनका लंड चूसने की चाहत बढ़ती जा रही थी.
मैंने इससे पहले चचेरे भाई के साथ सिर्फ मुठ मारना और लिप-किसिंग ही की थी, कभी लंड गांड में नहीं लिया था तो मेरी गांड में खुजली बढ़ती ही जा रही थी.
आखिर एक दिन मौका मिल ही गया.
उस समय वर्ल्ड कप के मैच चल रहे थे और उस समय डे नाईट मैच का प्रचलन शुरू ही हुआ था.
हमारे घर उस समय ब्लैक एंड व्हाइट टीवी था और मामा के घर कलर टीवी था.
वह संडे का दिन था.
मैं अपने घर पर अपने मामा के छोटे बेटे अभय के साथ मैच देख रहा था.
थोड़ी देर बाद उसने कहा- शरद, चल मेरे घर पर मैच देखेंगे.
मैंने हां कर दी और उसने मेरी मम्मी से बताया कि हम लोग उसके घर जा रहे हैं.
चूंकि रात को मैच देखकर मामा के घर रुकना था इसलिए मम्मी को बताना जरूरी था.
हम दोनों उसके घर पहुंच कर मैच देखने लगे.
उनके घर का टीवी रोशन भैया के कमरे में था.
उसके बाजू में छोटे बेटे अभय का कमरा था.
मुझे रात में उसी के साथ सोना था.
मैच बीच में छोड़ कर भैया अपने एक दोस्त के साथ बाहर घूमने चले गए क्योंकि वे कभी कभी ड्रिंक करते थे, तो उनका अपने दोस्त के साथ पीने का प्रोग्राम बन गया था.
मैच देखकर हमने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे.
मैं वहीं रोशन भैया के रूम में सो गया.
मुझे पता था कि रात को भैया अपने दोस्त के साथ पार्टी करके लौटेंगे.
उनका वह दोस्त भी वहीं रुकने वाला था.
रात को करीब 11 बजे भैया घर आए, डोरबेल बजी तो मैं समझ गया.
मैं जल्दी से बहाना करके बेड के बीच में रजाई ओढ़ कर सो गया.
वे दोनों रूम में आए, लाइट ऑन की तो देखा कि मैं सोया हुआ हूँ.
वे दोनों मेरे आजू बाजू सो गए.
डबल बेड था, तो आसानी से सो गए.
दिसम्बर माह की ठंडी का मौसम था.
अब एक तरफ भैया और एक तरफ उनके दोस्त थे.
मेरी खुशी का ठिकाना न था, इतने वर्षों की तपस्या का फल मिलने जा रहा था.
थोड़ी देर बाद मैंने नींद में करवट बदलते हुए अपना बायां हाथ और पैर भैया के ऊपर रख दिए.
उनको लगा कि मैं नींद में हूँ.
उन्होंने पहले तो कुछ नहीं कहा, फिर मेरी हिम्मत बढ़ी तो अपना हाथ उनके सीने में रख दिया.
मुझे लगा मैंने सब कुछ पा लिया है.
बालों से भरी उनकी छाती से लगा कि मैं लिपट ही जाऊं, लेकिन जब अगले ही पल भैया ने मेरा हाथ झटक दिया तो मुझे लगा कि मैं फंस गया.
वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे.
मैं डर गया और शांत लेटा रहा.
पर मैं आज ये मौका जाने नहीं देना चाहता था.
मैंने हिम्मत की और फिर से उनकी तरफ करवट लेकर हाथ को सीने में रख दिया.
उन्होंने फिर से मेरे हाथ को दूर कर दिया, पर इस बार मैंने हाथ को उठा कर उनके गालों पर रख दिया और पैर जांघ में.
भैया ने कुछ नहीं किया.
मैं ऐसे ही कुछ देर पड़ा रहा और सुख भोगता रहा.
हमारे चेहरे एकदम आमने सामने थे उनकी सांसें मेरी सांसों से टकरा रही थीं.
मैं उनके गाल पर हाथ रखे रहा.
मुझे यह डर भी था कि अगर मैं कुछ और करूंगा, तो भैया नाराज न हो जाएं.
कुछ देर मैंने सोचकर हिम्मत की और हाथ को गाल से हटा कर उनकी पीठ पर रख दिया.
इस बार भैया ने कुछ नहीं किया.
थोड़ी देर बाद में अपना हाथ उनकी पीठ पर धीरे धीरे फेरने लगा.
मुझे ऐसा लगा कि वे मेरे हाथ के स्पर्श से कुछ कुछ गर्म होने लगे थे क्योंकि उनकी सांसें लगातार तेज हो रही थीं.
उनके होंठों से पान की सुगंध आ रही थी, तो तेज सांसों के चलने से वह सुगंध मुझे बड़ी ही मस्त लग रही थी.
थोड़ी देर के बाद उनका हाथ उठा तो मैं समझा कि अब भैया मुझे पीटेंगे.
पर उनका हाथ उठ कर मेरी गर्दन से होता हुआ मेरे सर पर पीछे आ गया.
उन्होंने मेरे सर को खींच कर अपने होंठों को मेरे होंठों से सटा दिया.
मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि ये क्या हो गया.
भैया मेरे होंठों को चूसने लगे.
मैं भी उन पर टूट पड़ा.
मैंने अपने दोनों हाथों से उनके सर को कसके पकड़ लिया.
मुझ पर जैसे मदहोशी छाने लगी.
मैं उनके रंग में रंगने लगा.
उन्होंने मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथों से मेरी चूचियां दबाने लगे.
मैं जैसे पागल हो उठा.
इसके बाद भैया ने मुझे सीधा कर दिया और मेरी टी-शर्ट उतार दी.
मैं ऊपर से बिल्कुल नंगा हो गया.
उन्होंने अब अपने दांतों से मेरी चूचियों को दबा कर मींजना शुरू कर दिया.
उनके इस हौले हौले मीठे से स्पर्श से मैं मस्त होने लगा और मेरे मुँह से आह आह निकलने लगी.
अब मेरा मन उनके लंड को छूने का हो रहा था, तो मैंने अपने हाथ उनकी अंडरवियर के अन्दर डाल दिया और लंड को पकड़ लिया.
उनका लंड मोटा और लंबा था.
मुझे तो बस ऐसा लग रहा था कि कब मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसूँ, पर भैया का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा था.
अब उन्होंने मेरी और खुद की अंडरवियर उतार दी.
हम दोनों पूरी तरह नंगे हो चुके थे.
सेक्स का नशा बढ़ता जा रहा था.
वे मेरे ऊपर होकर अपना लंड मेरे दोनों जांघों के बीच फंसा कर ऊपर नीचे करने लगे.
मुझे डर लगने लगा कि ऐसा करने से वे जल्दी ही झड़ न जाएं और मेरी इच्छाएं अधूरी रह जाएं.
मैं ऐसा होने नहीं देना चाहता था और उनसे खुल कर कुछ बोल भी नहीं सकता था कि मुझे लंड चूसना है.
ज्यादा आवाज करता तो बाजू में सोए उनके दोस्त भी उठ सकते थे.
लेकिन मुझे उनका डर नहीं था क्योंकि भैया आज मेरे साथ थे.
तब मैंने झट से अपनी टांगें फैला दीं और भैया के लंड को अपने हाथों में लेकर मुँह से लगा लिया.
मेरे इस कदम से वे भी चौंक गए, पर मैं क्या करता … मौका हाथ से जाने भी नहीं दे सकता था.
मैं उनके लंड को लपालप चूसने लगा.
उनका लंड मोटा था तो मुँह में लेने में थोड़ा दर्द हो रहा था.
पर अब भैया भी मेरी भावनाओं को समझ चुके थे, तो वे उठकर बेड से टिक गए और अपनी टांग फैला कर बैठ गए.
मैं सामने से आकर झुक कर उनके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
उनको भी बहुत मजा आने लगा.
उन्होंने मेरे सर को पकड़ा और ऊपर नीचे करने लगे.
मैंने उनका लंड चूस चूस कर अपने थूक से बिल्कुल गीला कर दिया था.
मुझे तो मानो सारे जहां की खुशी मिल गई थी.
काफी देर तक मैं भैया का लंड चूसता रहा.
अब मेरी गांड में भी खुजली होने लगी थी.
पर मैं भैया से बोल नहीं सकता था कि मुझे गांड मरवानी है.
शायद भैया पहली बार किसी लड़के के साथ सेक्स कर रहे थे इसलिए शुरुआत मुझे ही करनी थी.
मैं लंड को चूसना बंद करके खुद ही पोज बनाने लगा.
मैंने उनकी दोनों टांगों को सीधा कर दिया और उनकी जांघों पर बैठ कर उनसे लिपट गया, उनको किस करने लगा, उनकी बालों से भरी छाती को किस करने लगा.
इसी बहाने से मैं अपनी गांड को उनके लंड पर सैट करने लगा.
उनको चूमते चूमते अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़ने लगा.
तो शायद उनको अहसास होने लगा कि मैं क्या चाहता हूँ.
उन्होंने भी मुझे मेरे कंधे से दबाना शुरू कर दिया और लंड पर मुझे दबाने लगे.
मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि मैं पहली बार गांड में लंड ले रहा था और वह भी इतना मोटा व लंबा.
पर मुझे लेना था.
इतने में भैया अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर मेरी गांड के छेद पर सैट करने लगे.
परंतु लंड सूखा होने के कारण गांड में अन्दर सरक ही नहीं रहा था.
मैं उठा और मैंने फिर से भैया के लंड को मुँह में लेकर थूक से गीला कर दिया.
अब मैं जल्दी से उनके लंड पर बैठ गया. उन्होंने निशाना साधा और थोड़ा झटका दे दिया.
उनके लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के अन्दर घुस गया.
मैं दर्द से सहम गया और मैं उठ गया.
मैंने भैया के लंड को बाहर निकाल दिया.
मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मेरी चुदाई की इच्छा समाप्त हो चुकी थी.
तब रोशन भैया उठे और कहीं चले गए.
मैं बाजू में रजाई ओढ़ कर सोने लगा.
पांच मिनट के बाद भैया आए और मेरे साथ रजाई में पीछे से चिपक कर सो गए.
वे अपने लंड को मेरी गांड पर सैट करने लगे, तो ऐसा लगा कि उनका लंड कुछ चिपचिपा सा है.
पता चला कि भैया अपने लंड पर तेल मलकर आए हैं.
उन्होंने अपना हाथ मेरी गांड पर फेरा और तेल लगाया.
फिर भी मुझे दर्द का डर लग रहा था.
मैं उनको मना भी नहीं कर सकता था क्योंकि शुरुआत मैंने ही की थी.
भैया ने लंड को मेरी गांड पर टिकाया और एक धक्का दिया.
लंड का सुपाड़ा अन्दर हो गया, तो मैंने छटपटाते हुए खुद को छुड़ाना चाहा … पर इस बार उन्होंने मेरी कमर को जोर से पकड़ रखा था.
उन्होंने फिर से एक धक्का दिया, तो पूरा लंड अन्दर हो चुका था.
मैं चीख पड़ा.
उन्होंने झट से मेरे मुँह को अपने हाथ से दबा दिया.
मुझे तो ऐसा दर्द हो रहा था मानो मेरी जान हलक में आ अटकी हो.
मैं दर्द से कराह रहा था पर भैया ने धक्के बढ़ा दिए.
कुछ देर बाद मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मजा आने लगा.
अब मैं भी अपनी गांड को आगे पीछे करने लगा.
मुझे बहुत मजा आने लगा था, पर लाइट बंद होने के कारण मैं भैया के चेहरे के भाव नहीं देख पा रहा था.
उनकी आवाज आ रही थी- हूँ आह हूँ आह!
इन आवाजों से साफ समझा जा सकता है कि मेरी जबरदस्त चुदाई हो रही थी.
अब तो जैसे जैसे धक्के पड़ते, उनकी जांघों के मेरे पिछवाड़े से टकराने की फट फट की आवाज आती.
कुछ देर बाद भैया ने लंड निकाला और पोजीशन बदली.
उन्होंने मेरी दोनों टांगें ऊपर उठाईं और मेरी कमर के नीचे तकिया लगा दिया.
सब कुछ सैट करके उन्होंने फिर से अपने लंड को मेरी गांड में पेल दिया.
इस बार मेरी गांड खुली हुई थी तो एक ही बार में भैया का पूरा लंड सटाक से घुस गया.
मेरी तो जान ही निकल गई.
मगर कुछ ही पलों में दर्द मजे में बदल गया.
अब भैया बिना रुके मेरी टांगें पकड़ कर धक्के मारे जा रहे थे.
करीब 15 मिनट तक धक्के लगाने के बाद उनकी स्पीड एकदम से बढ़ गई तो मैं समझ गया कि वे झड़ने वाले हैं.
मैंने उनका लंड हाथ में लेकर मुँह में ले लिया.
भैया के लंड से एक गर्म लावा फूटा जो सीधा मेरे मुँह में आया और अन्दर चला गया.
मैं मानो तृप्त हो गया था.
हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लिपट कर लेटे रहे.
फिर अलग हुए, बाथरूम जाकर फ्रेश हुए और वापस आकर सो गए.
सुबह मैं जल्दी उठा और मैं अपने घर चला गया क्योंकि मेरी भैया से नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं थी.
मैं करीब एक महीने तक भैया से नहीं मिला.
जब भी वे मुझे देखते तो मैं इग्नोर कर देता.
कुछ समय बाद रोशन भैया खुद मेरे घर आए और अपने साथ घर ले गए.
मैं कुछ भी नहीं कह सका.
दोपहर का समय था.
वे अपने रूम में मुझे ले गए और बोले- चल टीवी देखते हैं.
मैं बैठ गया.
वे भी बैठ गए.
थोड़ी देर बाद वे रूम से बाहर गए और जब लौटे तो दरवाजा बंद कर दिया.
वे मेरे पास आए और मुझे खड़ा करके बिना कुछ बोले किस करने लगे.
जल्दी ही हम दोनों गर्म हो गए.
आज सब कुछ उजाले में हो रहा था.
वे खड़े खड़े चूम रहे थे.
कुछ पल बाद उन्होंने मुझे नीचे होने के लिए दबाया तो मैं घुटनों के बल बैठ गया और उनका लंड चूसने लगा था.
मैं भैया का लंड काफी देर तक चूसता रहा.
फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बना कर लंड में तेल चुपड़ कर मेरी मखमली गांड पर अपना मोटा लौड़ा रखा और एक झटके में ही पेल दिया.
मैंने आह करके पूरा लंड अन्दर ले लिया.
फिर शुरू हुआ चुदाई का खेल.
भैया सटासट मेरी गांड में लंड पेले जा रहे थे.
मैं भी अब खुल कर गांड में लंड के मजे लूट रहा था.
फिर मैंने उनके लौड़े को अपनी गांड से बाहर किया और फिर से मुँह में लेकर चूसने लगा.
मस्त मजा आ रहा था.
फिर भैया ने मुझे पलंग पर झुका कर लंड को गांड में पेल दिया.
कुछ मिनट चोदने के बाद वे मेरी गांड में ही झड़ गए.
उस दिन आखिरी में भैया ने ‘आई लव यू’ कहा और पूछा कि कैसा लगा!
मैंने बोल दिया कि अच्छा लगा.
फिर हम अक्सर मिलने लगे.
दो साल बाद भैया की शादी हो गई.
आज उनके दो बच्चे हैं, फिर भी आज भी हमारे बीच प्यार बना हुआ है.
जब भी मौका मिलता है, हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
हम दोनों आपस में बहुत ज्यादा प्यार करते हैं. हमेशा कुछ नया करने का सोचते हैं.
दोस्तो, कैसी लगी मेरी बॉटम गे बॉय कहानी, प्लीज जरूर बताएं.
alokvarma@myyahoo.com